अमर नायक समानेह अब्दी; उसका नाम समानेह था
जान गंवाना समाने अब्दी 24 वर्ष में ईरान करज कियानमेहर
लेखक: नूरा
«सितारे जन्म लेते हैं और फिर मर जाते हैं।» यह उस लड़की ने लिखा था जिसके लिए आसमान सिर्फ़ सर के ऊपर तनी कोई छत भर नहीं था। गोया उसके दिल का ही कोई हिस्सा उसे अपनी ओर खींचता हो; कुछ ऐसा जो दिनों की आपाधापी में उसे चंद लम्हों का सुकून बख़्श देता था। उसे ढलती शामें पसंद थीं, वह आसमान को एकटक निहारती, उसके रंगों की तस्वीरें खींचती और उन्हें सहेज कर रख लेती; मानो हर बार जब वह सर उठाकर ऊपर देखती, तो कुछ पलों के लिए दुनिया-जहान की हर चीज़ से दूर निकल जाती। समानेह ऐसे ही छोटे-छोटे लम्हों से दिल लगा बैठती थी; उस रंग से जो आसमान में बस चंद मिनटों के लिए ठहरता, कुदरत से, जानवरों से, सफ़र से, संगीत से और उस रक़्स से जो कभी-कभी काम-काज के भरे दिन के बीच भी अपनी राह निकाल ही लेता था। वह टोपी को उलटकर पहन लेती, ताल के साथ झूम उठती और कुछ मिनटों के लिए दिन-भर की थकान को अपने वजूद से झाड़ फेंकती। अगर उसके अपनों में से किसी का दिल उदास होता, तो समानेह वहीं रुक जाती; वक़्त निकालती, उनकी बात सुनती और तब तक साथ निभाती जब तक कि उस पल का भारीपन कुछ हल्का न हो जाए। अपनी ज़िंदगी को भी वह इसी लगन और ज़िद के साथ आगे खींच रही थी। उसने अकाउंटिंग में डिप्लोमा किया था और करज के गोलदश्त के एक कारख़ाने में काम करती थी। शिफ़्ट का ख़त्म होना उसके काम का ख़त्म होना नहीं था; वह स्नैप पर टैक्सी भी चलाती थी। वह पाई-पाई ज…
سمانه عبدی · کرج · کیانمهر · مهرشهر