अमर नायक मोहम्मद रज़ा साएदी मोहम्मदिया
जान गंवाना मोहम्मद रज़ा साएदी मोहम्मदिये 20 वर्ष में ईरान मशहद अमीर मार्ग
लेखक: नफ़स
मोहम्मद रज़ा साएदी मोहम्मदीह २० वर्ष का था। वह मशहद का रहने वाला था और ख़्वाजा रबी इलाक़े में रहता था। वह ख़राद-कारी (टर्निंग) का छात्र था और इसी पेशे में काम भी करता था। उसके हाथ धातुओं से भली-भाँति परिचित थे और वह अपने काम का माहिर उस्ताद माना जाता था; एक ऐसा नौजवान, जो अपने हाथों के हुनर से अपना भविष्य तराश रहा था। उसका परिवार और परिचित उसे एक नेक, स्वाभिमानी और कुलीन लड़के के रूप में जानते हैं। उसमें असीम ऊर्जा थी; वह कर्मठ था, जीवंत था और उसकी मौजूदगी हर महफ़िल में जान फूँक देती थी। मगर जो बात उसे औरों से अलग बनाती थी, वह थी अपने वतन और हमवतनों के प्रति उसकी ज़िम्मेदारी का गहरा एहसास। इस भावना को माँ को भेजे उसके आख़िरी पैग़ाम में साफ़ देखा जा सकता है: «वतन के लिए जा रहा हूँ, परिवार के लिए जा रहा हूँ। कोई भूल-चूक हुई हो तो माफ़ कर देना।» ६ जनवरी (१६ दे माह) को शहज़ादे रज़ा पहलवी ने एक वीडियो संदेश के ज़रिये अपना पहला औपचारिक आह्वान जारी किया। मोहम्मद रज़ा ने इस पुकार को अनसुना नहीं किया। ८ जनवरी (१८ दे माह) को मशहद की अमीर सड़क लोगों के विरोध-प्रदर्शनों का एक प्रमुख केंद्र बनी हुई थी। उस रात कुछ घंटों के लिए सड़कों पर से विशेष सुरक्षा बलों का नियंत्रण पूरी तरह छूट चुका था और प्रदर्शनकारी मोर्चाबंदी करके दमनकारी सुरक्षाकर्मियों के सामने डट गए थे। मोहम्मद रज़ा भी वहीं, इस भीड़ क…
محمدرضا صاعدی محمدیه · محمدرضا صاعدی · دانشجو · مشهد