अमर नायक मेहदी साहेली

जान गंवाना मेहदी साहेली 38 वर्ष में ईरान रामसर

लेखक: कोहन

मेहदी साहेली माज़ंदरान के रामसर के रहने वाले थे और उनकी उम्र ३८ साल थी; एक ज़िंदादिल और हंसमुख इंसान, जिससे जुड़ी ढेर सारी यादें शहर के बाशिंदों और दोस्तों के दिलों में बसी थीं। अपनी आने वाली ज़िंदगी के लिए उन्होंने एक ख़्वाब संजो रखा था; वह एक ख़ूबसूरत और सलीक़ेदार कैफ़े शुरू करना चाहते थे और अपने इस सपने को सच करने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे थे—दिन में फ़ॉल्स सीलिंग (कनाफ़) का काम करते और रात में बीच क्लब (प्लाज़) में पसीना बहाते। तय तो यही था कि एक दिन अपने ही हाथों से खड़े किए उस कैफ़े में वह अपनी बरसों की मेहनत का फल देखेंगे; मगर अफ़सोस, वह दिन कभी न आ सका। मेहदी ने बचपन से ही अपनों को खोने का दर्द झेला था। जब वह महज़ १३ साल के थे, उनके सिर से पिता का साया उठ गया। उसके बाद उनकी माँ ने अकेले ही अपने तीनों बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया। २५ साल बाद, इस परिवार पर फिर वही क़यामत टूटी; इस बार मेहदी के बड़े भाई, रज़ा साहेली चले गए। जनवरी २०२६ (देई १४०४) से महज़ तीन महीने पहले, रज़ा एक सड़क हादसे में चल बसे। वह ब्रेन डेड हो चुके थे और ऐसे में परिवार ने उनके अंग दान करने का फ़ैसला लिया; एक ऐसा फ़ैसला, जिसने तीन इंसानों को नई ज़िंदगी अता की। मगर रज़ा के इंतक़ाल को अभी तीन महीने भी नहीं गुज़रे थे और माँ की कमर अपने बेटे के ग़म से सीधी भी न हो पाई थी कि मेहदी के मारे जाने की ख़बर आ पहुँच…

مهدی ساحلی · رامسر

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