अमर नायक फरशाद एहसानी नयेरी
जान गंवाना फ़रशाद एहसानी नैयरी 36 वर्ष में ईरान तेहरान फ़लाह
लेखक: जावेद
विदेशों में रह रहे ईरानियों के एक विरोध-प्रदर्शन में, एक व्यक्ति अपने हाथों में फ़रशाद एहसानी की तस्वीर थामे हुए था। आइदा रोस्तमी के एक क़रीबी इस व्यक्ति ने फ़रशाद को याद करते हुए एक ऐसी संजोई हुई याद साझा की, जो बरसों से उनके ज़हन में ताज़ा थी। उन्होंने बताया कि फ़रशाद उनके पड़ोसी थे और आइदा की हत्या के बाद, इमारत में जब भी उनसे सामना होता, वे उनका हाथ कसकर थाम लेते और कहते: «एक दिन हम आइदा की मौत का बदला ज़रूर लेंगे।» मगर इससे पहले कि वह आरज़ू हक़ीक़त का रूप ले पाती, ख़ुद फ़रशाद भी इस्लामिक गणराज्य के दमनकारी बलों की गोली का शिकार होकर अपनी जान गँवा बैठे। ३६ वर्षीय फ़रशाद एहसانی मूल रूप से तुर्क थे और तेहरान के अबूज़र मोहल्ले में रहते थे। वे तेहरान के शफ़ा यहयाइयान अस्पताल के रखरखाव विभाग में कार्यरत थे और एक नन्हीं बच्ची के पिता थे। उनकी ज़िंदगी काम, परिवार और आम रोज़मर्रा के बीच सुकून से गुज़र रही थी; वही ज़िंदगी, जो ८ जनवरी २०२६ (१८ दे १४०۴) की शाम तेहरान के फ़ल्लाह इलाक़े में उनकी कोख और चेहरे पर गोली लगने से हमेशा के लिए ख़त्म हो गई। ९ जनवरी २०२६ (१९ दे) की रात, परिवार को फ़ोन करके उनके पार्थिव शरीर की शिनाख़्त के लिए बुलाया गया। अगले दिन, कहरीज़क से उनका शव परिजनों को सौंपा गया और उसी दिन तेहरान के बहेश्त-ए ज़हरा क़ब्रिस्तान के खंड ۳۳۶ में उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया।…
فرشاد احسانی نیری · تهران · فلاح