अमर नायक मोहम्मद चेगेनी; चेगेनी क़बीले के सपूत
जान गंवाना محمد چگنی (شاکرمی) 31 वर्ष में ईरान खुर्रमआबाद चमूरत
लेखक: अनाहिता
मैं मोहम्मद चेगेनी (शाकरमी) हूँ, चेगेनी कबीले का एक बेटा और ख़ुर्रमाबाद के नज़दीक मामूलान ज़िले के चमवूर्त गाँव का रहने वाला। २० जून १९९४ (३० खोरदाद १३७३) के ढलते पलों में, गर्मियों की शुरुआत से महज़ एक दिन पहले, मैंने इस दुनिया में आँखें खोली थीं। कुछ ही समय पहले मेरी सगाई हुई थी और मेरी ख़्वाहिश थी कि अपना वैवाहिक जीवन शुरू करूँ, उस इंसान के साथ एक पुरसुकून मुस्तक़बिल तराशूँ जिसे मैं बेइंतहा चाहता था। मगर देय के महीने ने मेरी और मेरे वतन के अनगिनत लोगों की तक़दीर हमेशा के लिए बदल कर रख दी। जब ८ और ९ जनवरी (१८ और १९ देय) के विरोध-प्रदर्शनों की पुकार उठी, तो मैं भी अवाम के सैलाब के साथ कदम से कदम मिलाकर ८ जनवरी (१८ देय) को सड़कों पर उतर आया और ख़ुर्रमाबाद की नासिर ख़ुसरो सड़क पर मौजूद रहा। हुकूमत की फ़ौजों ने निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध गोलियाँ बरसा दीं। एक जंगी गोली मेरी दाईं पसली में आ धँसी, और जब मैंने वहाँ से हटने की कोशिश की, तो एक छर्रा मेरे पैर में भी आ लगा। मुझमें अब आगे बढ़ने की कोई सकत बाक़ी न रही। बाज़मीर और हमदर्द लोगों ने मुझे ख़ुर्रमाबाद के ताअमीन-ए-इज्तेमाई अस्पताल पहुँचाया। रास्ते भर मेरे होश-ओ-हवास क़ायम थे; मैं साफ़ सुन और महसूस कर रहा था कि आस-पास के लोग मुझसे लगातार बातें कर रहे थे और हर मुमकिन कोशिश कर रहे थे कि मैं होश न खो बैठूँ। मगर अस्पताल पर छाए संगीन सुरक्ष…
چمورت · خرم آباد · ایل چگنی · محمد چگنی (شاکرمی)