अमर नायक सैयद मेहदी हुसैनी; माँ को अभी तक नहीं पता
जान गंवाना सैयद मेहदी हुसैनी 41 वर्ष में ईरान तेहरान विजय
लेखक: अनाहिता
मेहदी तेहरान का एक नौजवान था; कसरत और बदन तराशने का शौकीन, बेहद दयालु और अपने परिवार का चहेता। वह अविवाहित था और पिता के देहांत के बाद उसके कंधों पर ज़िम्मेदारियों का बोझ और बढ़ गया था, जिससे वह परिवार का सहारा और कमाने वाला बन गया था। घर के ख़र्चे उठाने के साथ-साथ वह अपनी बीमार माँ की भी देखभाल करता था, जो ब्रेन ट्यूमर से जूझ रही थीं। मेहदी अपनी माँ के लिए महज़ एक बेटा नहीं था; वह उनका तीमारदार, हमदम और सबसे बड़ा सहारा था। उसका एक भांजा था जिसे वह बेपनाह प्यार करता था और उन दोनों के बीच एक बेहद गहरा और आत्मीय रिश्ता क़ायम था; एक ऐसा रिश्ता, जिसके मायने ८ जनवरी (१८ दे माह) के बाद उस बच्चे के लिए और भी बदल गए। ८ जनवरी २०२६ (१८ दे माह १४०४) की शाम, इस परिवार के लिए सब कुछ बदल गया। मेहदी, जो उस रात तेहरान के पीरूज़ी इलाक़े में था, पहले उस पर गोलियाँ चलाई गईं और उसके पैर में तीन गोलियाँ लगीं। घायल होने के बाद वह एक टैक्सी में सवार हुआ, लेकिन महज़ दो गलियाँ आगे, उसी गाड़ी के अंदर उस पर दोबारा गोलियाँ बरसाई गईं और दो गोलियाँ उसे और आ लगीं। मेहदी का शव रात तक़रीबन साढ़े दस बजे से अगले दिन दोपहर लगभग बारह बजे तक उसी गली में पड़ा रहा। आख़िरकार पड़ोसियों ने उसके शव पर एक कंबल डाल दिया। शव को वहाँ से हटाए जाने के बाद, परिवार वालों ने उसे कहरीज़क में ढूँढ निकाला। मेहदी की बहन ने उसकी याद में र…
سید مهدی حسینی · پیروزی تهران