अमर नायक अब्बास क़नबरी

जान गंवाना अब्बास क़नबरी 37 वर्ष में ईरान शिराज क़स्रदश्त

लेखक: नफ़स

वह पिता था, बेटा था, पति था; वह अब्बास क़नबरी था। शिराज़ के क़स्र-ए-दश्त का ३७ वर्षीय नौजवान, जो इंजीनियर था और गुयम में उसकी एक दुकान थी। मगर किसी भी पदवी या पेशे से पहले, वह पाँच साल की एक नन्ही बच्ची का पिता था, जिसके भविष्य में वह अपने ख़्वाब देखता था और जिसके लिए एक बेहतर कल तराशने की जद्दोजहद कर रहा था। अब्बास भी ईरान के अनगिनत अवाम की तरह, अपने बच्चे के लिए अधिक आज़ाद मुस्तक़बिल और एक गरिमामय जीवन की उम्मीद संजोए सड़कों पर उतर आया था। वह हिंसा के लिए नहीं, बल्कि उन मांगों को ज़ुबान देने के लिए मैदान में उतरा था जो ईरान के असंख्य नागरिकों के दिलों में दफ़न थीं। उसकी तमन्ना बस एक ऐसे ईरान की थी, जहाँ उसकी बेटी सुरक्षा, सुकून और उम्मीद के साए में ज़िंदगी बसर कर सके। ८ जनवरी २०२६ (१८ दे १४०४) के रोज़, शिराज़ शहर में जारी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान, अब्बास गुयम पुलिस थाने के सामने मौजूद था। सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, दमनकारी बलों ने सीधे उस पर निशाना साधकर गोली चलाई, और दिल को चीरती हुई निकली उस गोली ने उसकी जीवनलीला समाप्त कर दी। इस तरह, जो इंसान अपनी नन्ही बेटी के बेहतर कल के लिए सड़क पर निकला था, वह फिर कभी अपने घर न लौट सका। जान गँवाने के बाद, अब्बास का पार्थिव शरीर ९ दिनों तक सुरक्षा एजेंसियों के क़ब्ज़े में रहा और इस दौरान उसका परिवार अपने जिगर के टुकड़े को सुपुर्द-ए-ख़ाक…

جاویدنام های شیراز · عباس قنبری · شیراز · قصردشت

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