अमर नायक मेहरदाद याक़ूबी मेहर; शरीफ़ से लेकर ख़ूनी ८ जनवरी (१८ देह माह) तक

जान गंवाना मेहरदाद याक़ूबी मेहर 28 वर्ष में ईरान तेहरान शहर-ए-क़ुद्स ज़िला प्रशासन

लेखक: नूरा

वह कई साल पहले ही अपना सामान बाँधकर निकल सकते थे; जाने के लिए, आगे की पढ़ाई के लिए, और उस मुस्तक़बिल के लिए जो सरहदों के उस पार उनका इंतज़ार कर रहा था। मेहरदाद याक़ूबी मेहर देश की चुनिंदा प्रतिभाओं में से एक और शरीफ़ यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी में रसायन शास्त्र के पीएचडी छात्र थे, और इल्म की राह में वे इतना आगे बढ़ चुके थे कि उन्हें अमेरिका समेत कई मुल्कों से दावतनामे मिले थे। बहुतों के लिए ऐसा मौक़ा एक नई ज़िंदगी की शुरुआत होता, लेकिन मेहरदाद का दिल जाने को राज़ी न हुआ। जाने की राह उनके सामने खुली थी, मगर उनका दिल कहीं और ही अटका था; अपने वालिदैन से, अपने परिवार से, और उस ईरान से जिसके निर्माण में वे अपनी हिस्सेदारी चाहते थे। उनके भाई ने बाद में लिखा कि परिवार, ख़ासकर माँ-बाप से दूरी मेहरदाद के लिए नाक़ाबिले-बर्दाश्त थी और उन्होंने तय किया था: «अपनी ही मिट्टी की ख़िदमत करनी है»। दुनिया ने ईरान के इस होनहार नौजवान के लिए रास्ते खोल दिए थे, मगर मेहरदाद ने अपने परिवार और अपने वतन को आँखों पर बिठाया और यहीं रुक गए। मेहरदाद का जन्म ७ अक्टूबर १९९६ (१६ मेहर १३७५) को हुआ था और वे लोरेस्तान के दोरूद के रहने वाले थे; एक ग्रामीण और कबायली ख़ानदान से वाबस्ता, ऐसी जड़ों के साथ जो ज़िंदगी के आख़िरी दिन तक और उसके बाद भी उनके साथ रहीं। उन्होंने तालीम हासिल की और उसी सादगी भरे माहौल से शरीफ़ यूनि…

نخبه‌ی شریف · قلعه حسن خان · دورود لرستان · مهرداد یعقوبی مهر

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