अमर नायक इब्राहिम रूस्तनिया; ख़ामोशी तक ७३ दिन

जान गंवाना इब्राहिम रोस्तानिया 59 वर्ष में ईरान करज गोलशहर

लेखक: साये

इब्राहिम रूस्तानिया, ५९ वर्षीय, करज के गोलशहर के निवासी, दो बेटियों के पिता और खेल के सामान की एक दुकान के मालिक थे। २३ मार्च २०२६ (३ फ़रवरदीन १४०५) की बात थी; नौरोज़ शुरू हुए अभी बस कुछ ही दिन बीते थे। इब्राहिम के परिवार के लिए इस वसंत का रंग ही जुदा था; एक ऐसा वसंत जो ७३ दिनों के लंबे इंतज़ार के बाद आया था, एक ऐसा इंतज़ार जो दर्द और उम्मीद के बीच झूलता रहा था। ७३ दिनों से परिवार आँखें बिछाए बैठा था। फ़ोन की हर घंटी, सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) के दरवाज़े का हर बार खुलना और अस्पताल से आने वाली हर ख़बर उनके लिए एक नई तक़दीर लिख सकती थी। दिल में उम्मीद अब भी ज़िंदा थी; शायद इब्राहिम फिर लौट आएँ, शायद ये मुश्किल दिन गुज़र जाएँ। लेकिन इंतज़ार का अंत हो गया। आईसीयू में मशीनें थम गईं और मॉनिटरों की आवाज़ें ख़ामोश हो गईं। सब कुछ ९ जनवरी (१९ दी) से शुरू हुआ था। इब्राहिम उस दिन करज के गोलशहर में हुए प्रदर्शनों में मौजूद थे। जब उन्होंने दमनकारी बलों की गोलियों की आवाज़ सुनी, तो लोगों की मदद के लिए उस ओर भागे; लेकिन खुद ही गोली का शिकार हो गए। गोली उनकी गर्दन के दाहिनी ओर से घुसी और बाएँ ओर से बाहर निकल गई। लोग उन्हें अस्पताल ले गए। इब्राहिम अभी ज़िंदा थे, लेकिन उनका ज़ख़्म बहुत गहरा था। अस्पताल में, सुविधाओं की कमी के कारण, केवल उनके ख़ून के बहाव को ही रोका जा सका। फिर देरी से उन्हें दूसरे अ…

ابراهیم روستانیا · گلشهر کرج

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