अमर नायक जवाद जाहेदी; चाँदी-सा दमकता एक नाम

जान गंवाना जवाद जाहेदी 48 वर्ष में ईरान मशहद तबरसी चौक

लेखक: सरवा

उनके हाथ बरसों से कठोर धातु के सीने से नफ़ासत और खूबसूरती तराशते रहे थे, और सब्र, हुनर तथा मुहब्बत से हर अंगूठी में जान फूंक देते थे। लेकिन जो बात जवाद जाहेदी को औरों से अलग करती थी, वह सिर्फ़ उनका बेमिसाल हुनर ही नहीं था; बल्कि उनकी शांत रूह, नेक मिज़ाज और सादगी थी, जो उनके साथ उठने-बैठने वाले हर शख्स के ज़ेहन में हमेशा के लिए नक्श हो गई। ४८ वर्षीय जवाद जाहेदी, मशाद के सबसे पुराने और जाने-माने अंगूठी-साज़ों और चांदी के दस्तकारों में से थे। वे एक शादीशुदा इंसान और १६ और ८ साल के दो बच्चों के पिता थे, जिनका परिवार उन्हें घर का मज़बूत सुतून मानता था। उनकी ज़िंदगी सिर्फ़ कला तक ही महदूद नहीं थी। उन्होंने बरसों तक मार्शल आर्ट्स का भी पूरी लगन से अभ्यास किया था और 'दायदो जुको' विधा में ब्लैक बेल्ट और डैन ३ हासिल किया था। उनके लिए ताकत का मतलब कभी हिंसा नहीं था; अनुशासन, विनम्रता और सम्मान ऐसे मूल्य थे, जिनका पालन उन्होंने खेल के मैदान और रोज़मर्रा की ज़िंदगी, दोनों में पूरी शिद्दत से किया। उनके इसी अंदाज़ के कारण वे अपने साथियों, दोस्तों और अज़ीज़ों के बीच अपनी शराफ़त, खुशमिज़ाजी, शालीनता और दूसरों के प्रति आदरभाव के लिए पहचाने जाते थे। लेकिन गुरुवार, ९ जनवरी २०२६ (१९ देई १४०४) की शाम, जब शहज़ादे रज़ा पहलवी के आह्वान पर मुल्क के कोने-कोने में अवाम के विरोध का सैलाब अपनी दूसरी रात में चर…

جواد جاهدی · مشهد · ورزشکار · نقره‌ساز

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