अमर नायक अली याक़ूबी; आओ, आमने-सामने लड़ें
जान गंवाना अली याक़ूबी 21 वर्ष में ईरान तेहरान मैदान-ए-काज, सआदत आबाद
लेखक: नूरा
कुश्ती के उसूल उसने अपनी किशोरावस्था में ही अखाड़े के मैट पर सीख लिए थे; यह कि अगर किसी को मदद की दरकार हो, तो मुंह फेर कर नहीं गुज़रा जाता। उसके लिए कुश्ती महज़ कोई मुक़ाबला, पदक या चैम्पियनशिप नहीं थी; वह तो जवानमर्दी का सबक़ थी—एक ऐसा सबक़, जिसे वह बाद में अखाड़े से अपने साथ सड़कों तक ले आया। अली याक़ूबी का जन्म पश्चिमी तेहरान के फ़िरदौस मोहल्ले में हुआ था। वह परिवार का पहला बेटा था और अपनी माँ तथा बहन के साथ रहता था। लड़कपन के दिनों से ही ज़िंदगी ने उसे अपनी उम्र के साथियों से कहीं पहले ज़िम्मेदारियों से रूबरू करा दिया था। अपनी बहन से उसका बेहद गहरा लगाव था और वह हमेशा उसका सहारा व ढाल बनने की कोशिश करता था। उसके क़रीबी बताते हैं कि कम उम्र होने के बावजूद, उसकी समझ, सूझबूझ और ज़िम्मेदारी का अहसास उसकी उम्र से कहीं बड़ा था। उन्हीं दिनों से उसने अपने भविष्य की राह चुन ली थी। उसने पूरी लगन से कुश्ती को अपनाया, राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता और कुछ समय तक अभिनय की दुनिया में भी सक्रिय रहा। उसके दोस्त उसे सिर्फ़ एक पहलवान ही नहीं, बल्कि एक बड़े भाई जैसा, नेक-दिल और मददगार इंसान मानते थे; एक ऐसा शख़्स, जो किसी पर ज़ुल्म होते देखकर कभी बेपरवाह नहीं रह सकता था। जिन्हें वह चाहता था, उनके लिए वह खुद को दांव पर लगा देता था; उन्हें आंच आने से पहले वह खुद हर तकलीफ़ सहना गवारा कर लेता था। आने वा…
کشتیگیر · علی یعقوبی · تهران · سعادت آباد