अमर नायक निगार-ए-अजम
जान गंवाना नेगार अजम 27 वर्ष में ईरान मशहद गोनाबाद
लेखक: जावेद
अमर नायक निगार अजम, जन्म ९ अगस्त १९९८ (१८ मोर्दाद १३७७), उम्र २७ वर्ष, गोनाबाद की निवासी और कानून की स्नातका थीं। वह एक ऐसी लड़की थीं जो अपना भविष्य कानून, न्याय, स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा के साए में देखती थीं और जिनका विश्वास था कि एक स्वतंत्र समाज केवल कानून के शासन से ही सार्थक हो सकता है। निगार का विवाह बीस वर्ष की आयु में हुआ था और उनका परिवार २१ मार्च २०२६ (नौरोज़ १४०५) में विवाह समारोह के आयोजन की तैयारियाँ कर रहा था। लेकिन ८ जनवरी २०२६ (१८ दे १४०۴) की शाम, जब वह प्रदर्शनकारियों का साथ देने मशहद की सड़कों पर उतरीं, तो तकदीर में कुछ और ही लिखा था। अश्रुगैस के धुएँ और सड़कों की अफ़रातफ़री के बीच वह अपने दोस्तों से बिछड़ गईं। अपने परिवार को अपनी कुशलता की सूचना देने के लिए उन्होंने एक वाहन चालक से फोन माँगा, पर उनकी वह कॉल कभी अपनी मंज़िल तक नहीं पहुँच सकी। उसी रात से उनके परिवार और दोस्त लगातार अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों की ख़ाक छानते रहे। हर बार उन्हें यही आश्वासन दिया जाता कि निगार ज़िंदा हैं, और इसी उम्मीद के सहारे उनकी तलाश जारी रही; मगर १० जनवरी २०२६ (२० दे) की दोपहर मशहद के 'बहेश्त-ए रिज़वान' शवगृह में उनके इस इंतज़ार का अंत हो गया, जहाँ उन्हें निगार का बेजान शरीर मिला। रिपोर्टों के अनुसार, मशहद के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान निगार "तानाशाह की मौत हो, स्वतंत्रता ज़िंद…
نگار عجم · گناباد · خراسان رضوی · مشهد