अमर नायक ईमान नौरोज़ी
जान गंवाना ईमान नौरोज़ी 21 वर्ष में ایران
लेखक: नफ़स
तेहरान के बेहिश्त-ए-ज़हरा के सर्द गोदामों के बीच, १४ जनवरी २०२६ (२४ दी १४०४) की शाम, एक परिवार ने सुरक्षा मुचलके के काग़ज़ात पर दस्तख़त किए ताकि उन्हें गोदाम की गहराइयों में जाने की अनुमति मिल सके। आँखों देखी तलाश शुरू हुई; काँपते मगर दृढ़ हाथों ने एक-एक कर कफ़न-नुमा थैलियों में लिपटे शवों को टटोला। आखिरकार, उन्हीं सर्द प्लास्टिक के बिस्तरों के दरमियान, ईमान का चेहरा नज़र आ गया। इक्कीस वर्ष का एक नौजवान, जिसके जिस्म पर सीधी गोलीबारी का निशान था। इक्कीस वर्षीय ईमान नौरोज़ी एक फ़ुटबॉलर और बॉडीबिल्डर था, जो तेहरान के क्षेत्र १६ के नाज़ी-आबाद इलाक़े का निवासी था। उसने हाल ही में अपनी अनिवार्य सैन्य सेवा पूरी की थी; बूट और वर्दी के दौर के बाद ज़िंदगी की दहलीज़ पर खड़ा एक नौजवान। बारह-दिवसीय जंग के दौर में, वह पारचीन छावनी में एक अनिवार्य सेवा का सिपाही था। उसके जनाज़े में शरीक होने आए दोस्तों ने बताया कि उन दिनों ईमान ने अपने कई साथी सैनिकों की जान बचाई थी। ईमान, इमाम हुसैन का ख़ादिम था और तासूआ तथा आशूरा के आयोजनों में शिरकत करता था। शहज़ादा रज़ा पहलवी की पुकार सुनकर, वह उन नौजवानों में शामिल था जो ८ जनवरी २०२६ (१८ दी) को अवाम के कारवां से जा जुड़े थे। उस रात तेहरान का नाज़ी-आबाद इलाक़ा अवाम के अज़ीम हुजूम का गवाह बना। इस्लामी गणराज्य के सुरक्षा बल और विशेष दस्ते प्रदर्शनकारियों पर आँस…
ایمان نوروزی · جاویدنام · تهران · فوتبالیست