अमर नायक सोहेल सादेक़ी; स्वर्णकारी की बज़्म से आज़ादी के रज़्म तक

जान गंवाना सोहेल सादेक़ी 20 वर्ष में ईरान तेहरान सादेक़िया

लेखक: आरिशा

गुरुवार, ८ जनवरी २०२६ (१८ दे माह १४०४) की शाम, देशव्यापी जनाक्रोश के बीच और शहज़ादे रज़ा पहलवी के आह्वान पर, तेहरान निवासी २० वर्षीय सुनार सुहैल सादेक़ी सादेक़ियेह (आर्याशहर) इलाक़े में प्रदर्शनकारियों से जा मिले। अपने परिजनों और दोस्तों की नज़र में सुहैल वतन पर जान छिड़कने वाले, ईरान और उसके चप्पे-चप्पे से बेपनाह मुहब्बत करने वाले नौजवान थे, जिनके दिल में देश की आज़ादी की हसरत मचल रही थी। उसी रात, इस्लामी गणराज्य के दमनकारी बलों और उनके कारिंदों ने उन्हें अगवा कर लिया और सरकारी सुरक्षाकर्मियों द्वारा सिर पर लाठियों के ताबड़तोड़ और बेरहम वारों से खोपड़ी चकनाचूर हो जाने के कारण उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया। इसके बाद, सादेक़ी परिवार ने पूरे पाँच दिन घोर असमंजस, मुकम्मल बेख़बरी और उम्मीद व खौफ़ के साए में हिरासत केंद्रों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की ख़ाक छानी; जबकि शुरुआत में उन्हें झूठी दिलासा दी जाती रही कि सुहैल ज़िंदा हैं। आखिरकार १३ जनवरी २०२६ (२३ दे माह १४०४) को, परिजनों ने कहरीज़क के फ़ॉरेंसिक विभाग में उनके क्षत-विक्षत और निष्प्राण शरीर की शिनाख़्त की। पार्थिव देह मिलते ही सुरक्षा तंत्र का दबाव और धन उगाही का सिलसिला शुरू हो गया; अफ़सरों ने शव सौंपने के बदले इस झूठे लिखित हलफ़नामे पर दस्तख़त की शर्त रख दी कि «सुहैल बसीज का सदस्य था और प्रदर्शनकारियों के हाथों मारा गया।» साथ ह…

سهیل صادقی · طلاساز · صادقیه (آریاشهر) · کهریزک

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