अमर नायक नाज़नीन (हव्वा) सैय्यदी हाजी आग़ा; मैं अपने बेटे के लिए जा रही हूँ
जान गंवाना नाज़नीन(हव्वा) सैय्यदी हाजी आग़ा 45 वर्ष में ईरान करज तालेक़ानी
लेखक: सफ़र
हव्वा सैय्यदी हाजीआक़ा, पैंतालीस वर्षीय महिला थीं और करज के गोलशहर में रहती थीं; अपने आसपास के लोगों के बीच वे ‘नाज़ी’ या ‘नाज़नीन’ के नाम से जानी जाती थीं। वे एक ऐसी माँ थीं जिन्होंने ज़िंदगी की तमाम ज़िम्मेदारियों और अपने बच्चे के पालन-पोषण का बोझ अकेले अपने कंधों पर उठाया था और अपने ही आत्मबल के सहारे ज़िंदगी के सफ़र को आगे बढ़ाया था। नाज़ी करज के गोलशहर इलाके में स्थित ‘कामेलिया ब्यूटी एंड लेज़र क्लिनिक’ में काम करती थीं। उनके पेशे के सबब हर रोज़ अलग-अलग तबकों और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों से उनका वास्ता पड़ता और वे उनके सुख-दुख की बातें सुनती थीं। इन्हीं राब्तों के ज़रिये वे आम लोगों की मुश्किलों, चिंताओं और ज़िन्दगी की दुश्वारियों से भली-भाँति वाक़िफ़ थीं; उन तकलीफ़ों से, जो किसी न किसी रूप में लोगों के रोज़मर्रा के जीवन में मौजूद थीं। शायद अवाम की ज़िंदगी और उनके दर्दों से यही क़ुरबत थी जिसने उनके दिल में एक बेहतर समाज की ख़्वाहिश को और गहरा कर दिया था। इन तमाम बरसों में नाज़ी के दिल में ईरान के लोगों के लिए एक बेहतर ज़िंदगी की तड़प हमेशा मौजूद रही। यह फ़िक्र उनके लिए महज़ एक गुज़रता हुआ अहसास नहीं थी; बल्कि मुल्क के नाज़ुक राजनीतिक और सामाजिक मोड़ों पर यह उनकी मौजूदगी और विरोध के रूप में नुमायाँ होती थी। वर्ष २००९ (१३८८) में, राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के ख़िलाफ़ उभरे ‘सब्…
حوا سیدی حاجیآقا · نازنین سیدی · گلشهر کرج · نازی سیدی