अमर नायक सामान दोस्तकाफ़ी; मेरे बेटे की तस्वीर देखिए
जान गंवाना سامان دوست کافی 35 वर्ष में ईरान करज फ़रदीस
लेखक: आवीन
बर्फ़ के महीन फाहे आहिस्ता-आहिस्ता क़िले की पथरीली दीवारों पर ठहर रहे थे और सामान हमारे साथ था। हम ख़ुर्रमाबाद की घुमावदार सड़कों से हौले-हौले गुज़र रहे थे। वह प्राचीन और मौन दुर्ग पहाड़ की चोटी पर सीना ताने खड़ा था; जहाँ चट्टानें बादलों के आगोश में ओझल हो रही थीं और ज़मीन व आसमाँ की सरहदें धुंधली पड़ रही थीं। ३५ साल पहले भी, जिस रोज़ सामान ने दुनिया में आँखें खोली थीं, ऐसे ही बर्फ़ गिर रही थी। उसके अपने कहते हैं कि सामान हमारे लिए ज़िंदगी का सबसे अनमोल तोहफ़ा था, जो बर्फ़ के साथ ही इस जहाँ में आया था और उसी पाकीज़ा सफ़ेदी की चादर ओढ़े अपनी माँ के घर लौट रहा था। सामान दोस्त-काफ़ी, हसन और नसरीन का बेटा, एक ३५ वर्षीय इंजीनियर और उद्यमी था जो करज के फ़रदीस में रहता था। उसके करीबी उसे एक बेहद ख़ुशमिज़ाज इंसान और परिवार का मज़बूत संबल मानते थे। उसे पहाड़ों से गहरा लगाव था, तैराकी का शौक़ था और वह एस्तेक़लाल टीम का पक्का समर्थक था। इन सबसे बढ़कर, उसकी दिली तमन्ना थी कि ईरान के बच्चे एक दिन एक आज़ाद और महफ़ूज़ सरज़मीं पर ज़िंदगी बसर करें; एक ऐसा मुस्तक़बिल जिस पर उसका अटूट यक़ीन था कि आने वाली पीढ़ियों को उसे देखना ही चाहिए। बर्फ़ के बोझ से पेड़ों की नंगी डालियाँ झुक गई थीं, क़िले की तलहटी से बहती नदी एक दूधिया मैदान के सीने से गुज़र रही थी और जाड़े की यह ठिठुरन हमें ८ जनवरी २०२६ (१…
سامان دوست کافی · فردیس کرج · قلعه گردن شهسوار · مهندس