अमर नायक सज्जाद असग़री
जान गंवाना सज्जाद असग़री 33 वर्ष में ईरान करज फ़रदीस
लेखक: मेहरशीद
सज्जाद असग़री अपने परिवार का ३३ वर्षीय इकलौता बेटा था; एक ऐसा नौजवान जिसे उसके अपने निडर, साहसी, प्रबुद्ध, दयालु और दूसरों की मुश्किलें हल करने वाला इंसान बताते हैं। उसकी माँ सुन नहीं सकती थीं, पिता हृदय रोग से पीड़ित थे और सज्जाद ही पूरे परिवार का मुख्य सहारा था। ९ जनवरी (१९ देह माह) की रात, सज्जाद को प्रदर्शनों में अपने मौसेरे भाई के मारे जाने की ख़बर मिली। इस ख़बर ने उसे भीतर तक झकझोर कर रख दिया। रात के लगभग १० बजे वह घर से निकला और उसी पल से परिवार पर एक अजीब सी गहरी चिंता का साया छा गया। उन घंटों में मोबाइल नेटवर्क ठप पड़े थे और संपर्क साधने या कोई ख़बर पाने का कोई रास्ता न था। माँ और परिवार के अन्य सदस्य इस उम्मीद में बार-बार उसका नंबर मिलाते रहे कि शायद पल-भर के लिए नेटवर्क बहाल हो जाए। वे घंटों आस-पास की गलियों और सड़कों पर उसे ढूँढ़ते रहे, मगर सज्जाद का कहीं कोई सुराग़ न मिला। आखिरकार रात के लगभग १:३० बजे, जब फ़ोन लाइनें जुड़ीं, तो कॉल लग गई। एक अनजान महिला ने फ़ोन उठाया और बताया कि सज्जाद की हालत ठीक नहीं है और ख़ालेक़ी क्लिनिक में उसे ड्रिप चढ़ाई जा रही है। यह सुनकर परिवार ने सोचा कि शायद आँसू गैस अंदर चले जाने के कारण उसकी तबियत बिगड़ गई होगी, और वे भागते हुए क्लिनिक पहुँचे। मगर क्लिनिक में जो मंज़र उनका इंतज़ार कर रहा था, वह कभी न भूलने वाला एक भयानक दुःस्वप्न था। क्लि…
فردیس · سجاد اصغری · کرج