अमर नायक नीमा वलीपूर
जान गंवाना नीमा वलीपूर 25 वर्ष में ईरान तेहरान
लेखक: अर्शान
नीमा वलीपुर; वह ज़िंदगी जो दुकान के दरवाज़े के पीछे अधूरी रह गई मैं नीमा वलीपुर हूँ। मेरा जन्म क़ायमशहर में हुआ था और मैं तेहरान के शहरक-ए अंदेशे में रहता था। मेरे दिन काम, कसरत, और परिवार व दोस्तों से मिलने-जुलने के दरमियान गुज़रते थे। शहरक-ए अंदेशे के फ़ेज़ तीन में, पसाज-ए नगीन के नीचे, मेरी प्रोटीन और माँस-उत्पादों की एक दुकान थी और मैं उसे चलाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करता था। बाक़ी नौजवानों की तरह, मैं भी अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता था और अपनी ही कोशिशों से ज़िंदगी को संवारना चाहता था। मुझे बॉडीबिल्डिंग का बहुत शौक़ था। जिम जाना मेरी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का तयशुदा हिस्सा था और मुझे कसरत करने में दिली सुकून मिलता था। उन दिनों की जो तस्वीरें बाक़ी रह गई हैं, उनमें मैं कभी जिम में तो कभी अपनी गाड़ी के पास नज़र आता हूँ; उन दिनों की सादी सी यादें, जब मैं ज़िंदगी जीने में मगन था और भविष्य के लिए मेरे पास कई योजनाएँ थीं। मेरी अभी शादी नहीं हुई थी। परिवार और दोस्त मेरी ज़िंदगी का सबसे अहम हिस्सा थे। बाद में, जब मेरे मारे जाने की ख़बर फैली, तो दोस्तों ने अपने पैग़ामों में मुझे ‘घर का बेटा’, ‘भाई’ और ‘सच्चा यार’ कहकर याद किया। हर किसी ने किसी तस्वीर या चंद अल्फ़ाज़ के साथ हमारी साझी यादों को याद किया। जनवरी २०२६ (दी माह १४०४) में, ईरान के मुख़्तलिफ़ शहरों में देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन जा…
نیما_ولیپور · انقلاب شیروخورشید · شاهی ریکا