अमर नायक मजीद फ़र्रुख़ज़ाद ममशली
जान गंवाना मजीद फ़र्रुख़ज़ाद 37 वर्ष में ईरान तेहरान पीरोज़ी मार्ग
लेखक: नफ़स
१२ जनवरी २०२६ (२२ दे १४०۴) को भोर के चार बजे थे, जब मजीद फ़र्रुख़ज़ाद ममशली के पार्थिव शरीर को उसकी ज़ादगाह, गोलेस्तान प्रांत के मीनूदश्त ज़िले की मिट्टी में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। सुबह-सवेरे का यह दफ़्न कड़े सुरक्षा पहरे के साए में अंजाम पाया। किसी भी तरह के जमावड़े और आम जनाज़े पर सख़्त पाबंदी थी। क़िज़िलबाश तुर्कों से ताल्लुक़ रखने वाले और अपनी ज़िंदगी के कई बरस राजधानी में गुज़ारने वाले ३७ वर्षीय एक नौजवान की ज़िंदगी का आख़िरी बाब यूँ ही, पौ फटने से पहले की ख़ामोशी में हमेशा के लिए सिमट गया। इस वाक़ये से पहले मजीद अपनी पत्नी और पाँच बरस के मासूम बच्चे के साथ तेहरान में रहता था। उसके अज़ीज़ों ने उसकी याद में जो संस्मरण लिखे हैं, उनमें वे उसे एक नेक-नीयत और बेहद शफ़क़त भरा इंसान बताते हैं, जो अपने तीन लोगों के छोटे से कुनबे के लिए पूरी तरह समर्पित था और घर का दिली सुकून था। वह एक ऐसा पिता था जिसके मिज़ाज में घर के भीतर का अमन-चैन और ज़माने के हालात के रूबरू बेबाक बहादुरी, दोनों का अनूठा संगम था। जनवरी २०२६ (दे १४०۴) के देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के आग़ाज़ के साथ ही, उसकी तक़दीर राजधानी की हलचलों से जुड़ गई। बेतहाशा महँगाई और मुल्क की मुद्रा में आई भारी गिरावट से भड़का अवाम का ग़ुस्सा, शुरुआती दिनों में ही खाली दस्तरख़ानों की फ़िक्र से कहीं आगे निकल गया और एक खुली माँग में बदल ग…
مجید فرخزاد ممشلی · مینودشت · تهران