अमर नायक मेहदी नजफ़ी

जान गंवाना मेहदी नजफ़ी 22 वर्ष में ईरान मशहद गोनाबाद

लेखक: रोझावा

पत्थर उसकी उंगलियों के लिए कोई अजनबी नहीं था; बरसों से उसके हाथों का साथी जो रहा था। उसका वज़न, उसका खुरदुरापन और घंटों का वह बारीक काम जो पूरे धैर्य से करना पड़ता था, उसी ने तो उन दोनों के बीच यह आत्मीयता रची थी। संगतराशी उसका पेशा था—एक ऐसा काम जो हाथों की ताक़त और सब्र से आगे बढ़ता था और उसकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को सँवारता था। वह ईरान के गोनाबाद का रहने वाला मेहदी नजफी था; दक्षिण ख़ुरासान रज़ावी प्रांत का एक शहर, जो मशहद से २६० से २७० किलोमीटर की दूरी पर बसा है। मेहदी का जन्म १४ सितंबर २००३ (२३ शहरोवर १३८۲) को गोनाबाद में हुआ था और बाइस साल की उम्र में, वह अपने जीवन को हसीन बनाने की उम्मीद में, उसी शहर में संग और ख़ाक के बीच अपने ज़्यादातर दिन गुज़ारता था। जनवरी २०२६ (दी १४۰۴) में ईरान सुलग रहा था, ठीक वैसे ही जैसे पिछले ५० सालों से सुलगता आया था, जब भी लोग आज़ादी और एक गरिमापूर्ण जीवन के अपने हक़ के लिए सड़कों पर उतरते थे। विरोध की यह चिंगारी तेहरान के बाज़ार से भड़की थी। कहने को तो यह डॉलर की बढ़ती क़ीमतों और रोज़ी-रोटी की तंगी का विरोध था, लेकिन ईरानी लोग महज़ आजीविका से कहीं बढ़कर कुछ चाहते थे—आज़ादी। वह आज़ादी, जिसका ख़ूबसूरत चेहरा बरसों से ज़ुल्म के काले बादलों के पीछे ओझल है। मेहदी भी, इस सरज़मीन के कई दिलेर युवाओं की तरह, अपने हक़ की ख़ातिर आवाम के साथ आ खड़ा हुआ था; अप…

جاویدنام مهدی نجفی · جاویدنامان گناباد · جاویدنامان خراسان رضوی · جاویدنامان مشهد

यहाँ पूरा पाठ पढ़ें

Narrata

Documented Truth by Independent Voices

A multilingual platform preserving personal narratives, eyewitness accounts, and untold stories.