अमर नायक महसान जहानी
जान गंवाना महसान जहानी 20 वर्ष में ईरान रिश्ता महदिया क्षेत्र
लेखक: रूदाबेह
ग़ीलान प्रांत के बंदर-ए-अंज़ली की रहने वाली बीस वर्षीया युवती महसान जहानी का जन्म वर्ष २००५ (१३८४) में हुआ था। वह एक युवा छात्रा थी; उस पीढ़ी से, जिसने हाल के वर्षों में विरोध की आवाज़, आज़ादी की तलब और दमन के आगे सीना तानकर खड़े होने का एक भारी बोझ अपने कंधों पर उठाया था। गुरुवार, ८ जनवरी २०२६ (१८ दे १४०४) को रश्त अपने सबसे ख़ूनी दिनों में से एक से गुज़र रहा था। रश्त के बाज़ार से लेकर आस-पास की सड़कों और कूचों तक विरोध प्रदर्शनों का सैलाब उमड़ पड़ा था और हुकूमत के कारिंदे अवाम को कुचलने के लिए सड़कों पर उतर आए थे। ख़बरों से आंसू गैस के अंधाधुंध इस्तेमाल और प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां बरसाए जाने की तस्दीक़ हो रही थी; यह एक ऐसा दिन था, जिसका नाम आगे चलकर ग़ीलान के लोगों के ज़ेहन में प्रदर्शनों के ख़ूनी दमन के तौर पर हमेशा के लिए दर्ज हो गया। महसान भी उस रोज़ रश्त शहर में मौजूद थी। प्रदर्शनों के दौरान, महदिएह के दायरे और बाज़ार व मह-पारेह के आस-पास के इलाक़ों में वह ज़ालिम सुरक्षाकर्मियों की सीधी गोलीबारी का शिकार हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के मुताबिक, जब प्रदर्शनकारी पीछे हट रहे थे, तब उसे पीछे से और बिल्कुल नज़दीक से छर्रे वाली बंदूक से निशाना बनाया गया। खोपड़ी के नाज़ुक हिस्से और सिर के पिछले भाग में अनगिनत छर्रे धंस जाने के सबब वह उसी पल बेसुध होकर ज़मीन पर गिर पड़ी।…
مهسان جهانی · رشت · بندرانزلی