मजीद करीमी; एक ऐसा नाम जिसे थोपी गई कहानियों के नीचे दबकर गुम नहीं होना चाहिए।
जान गंवाना मजीद करीमी 49 वर्ष में इरान तेहरान तेहरानपार्स
लेखक: दाद अवा
मजीद करीमी, जिनका जन्म १९७६ (१३५५) में हुआ था, तेहरान में रहते थे। करीबी और विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, वह मेहराबाद हवाई अड्डे पर काम करते थे; एक ऐसा व्यक्ति जो अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी, काम, परिवार और शहर की उसी साधारण दुनिया का हिस्सा था, जिसे अचानक एक गोली ने उनसे छीन लिया। मजीद करीमी का नाम जनवरी २०२६ (दी १४०४) के विरोध प्रदर्शनों में मारे गए लोगों की कुछ सार्वजनिक सूचियों और अभिलेखों में भी दर्ज है। इन अभिलेखों में उनकी उम्र और मृत्यु की तारीख जैसे कुछ विवरणों को लेकर मतभेद दिखाई देते हैं। इसके बावजूद, करीबी और जानकार सूत्र इस बात पर ज़ोर देते हैं कि मजीद करीमी का जन्म १९७६ (۱۳۵۵) में हुआ था और ९ जनवरी २०२६ (१९ दी १४०४) को तेहरानपार्स में सीने में गोली लगने से उनकी मृत्यु हो गई थी। उन्हीं सूत्रों के अनुसार, उनकी मृत्यु के बाद मजीद करीमी के परिवार पर उन्हें "बसीजी" (सरकारी अर्धसैनिक बल का सदस्य) घोषित करने के लिए दबाव डाला गया। यह दबाव केवल एक शब्द या पदवी बदलने तक सीमित नहीं है; बल्कि यह एक इंसान को उसके जीवन और मृत्यु की वास्तविक कहानी से दूर करने की कोशिश है। जिस परिवार ने अपना प्रियजन खोया है, उसे यह अधिकार होना चाहिए कि वह उसे उसके अपने नाम, अपनी सच्चाई और अपने शोक के साथ याद रखे; न कि उस थोपी गई कहानी के साये में जो उन पर ज़बरदस्ती लादी गई है। मजीद करीमी के बारे में ऐसी…
مجید کریمی · تهرانپارس · شلیک گلوله · تهران