अमर नायक हुसैन हैदरी; सड़कों पर आप सभी की कमी खल रही है
जान गंवाना हुसैन हैदरी 50 वर्ष में ईरान तेहरान
लेखक: सीरवान
मैं हुसैन हैदरी हूँ; तेहरान का एक इंसान, एक ऐसा पिता जो अपने परिवार से बेहद प्यार करता था और जिसे हँसने-मुस्कुराने और ज़िंदगी का जश्न मनाने से दिली ख़ुशी मिलती थी। जो लोग मुझे जानते थे, वे अक्सर मुझे मेरी मुस्कान और ज़िंदादिली के लिए याद करते हैं। मुझे फ़ुटबॉल बहुत पसंद था और मैं एस्तेक़लाल क्लब का पक्का समर्थक था। नीला रंग मेरे लिए जाना-पहचाना और अज़ीज़ रंग था; उस टीम का रंग, जिसके हर मैच पर मेरी नज़र रहती थी और जिससे मुझे बेहद लगाव था। मेरी एक बेटी थी, जिसकी मौजूदगी मेरी ज़िंदगी का सबसे अहम हिस्सा थी। पिछले साल मेरे जन्मदिन पर उसने मुझे एक जोड़ी बूट तोहफ़े में दिए थे। एक ऐसा तोहफ़ा, जो शायद देखने में तो बहुत मामूली लगता, मगर मेरे लिए उसकी बेपनाह मुहब्बत की निशानी था। मैं उन जूतों को पहनता रहा, यह जाने बिना कि एक दिन वही बूट मेरे बेजान जिस्म की शिनाख़्त का ज़रिया बन जाएँगे। मेरी ज़िंदगी भी ईरान के बाक़ी अवाम की तरह रोज़मर्रा की जद्दोजहद और चिंताओं से घिरी थी। मैं एक ऐसे शहर में रहता था जहाँ के लोग आर्थिक तंगहाली, पाबंदियों और मुस्तक़बिल के ख़ौफ़ से जूझ रहे थे। अपने मुल्क के हालात और उस पर गुज़रने वाले इस क़हर के आगे मैं बेपरवाह और ख़ामोश नहीं रह सकता था। जनवरी २०२६ (दी माह १४०४) में पूरे ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की आग फैल गई। अलग-अलग शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए और अप…
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