अमर नायक यासिर क़ंदाली; पापा यासिर, मेरे नायक
जान गंवाना यासिर क़ंदाली 42 वर्ष में ईरान तेहरान अफ़सरियेह
लेखक: देलआरा
यासिर क़ंदाली के पारिवारिक मेल-मिलापों और सफ़रों के जो वीडियो बाक़ी रह गए हैं, उनमें उन्हें अपने अज़ीज़ों के बीच देखा जा सकता है; वे हँस रहे हैं, नाच रहे हैं और सबकी खुशियों में शरीक हैं। एक ऐसे शख़्स की ज़िंदगी के खुशनुमा लम्हों की तस्वीरें, जिसकी हँसी और खुशियाँ अब उसके परिवार के लिए महज एक याद बनकर रह गई हैं। अली और शहीन के बेटे यासिर का जन्म गर्मसार में हुआ था। वे कई सालों से तेहरान में रह रहे थे और मेट्रो में कार्यरत थे। उनकी उम्र ४२ साल थी और वे मेहरसा नाम की सात बरस की एक नन्हीं बच्ची के पिता थे, जो उनके दिल के बेहद करीब थी। उनके अपने उन्हें एक बेहद दयालु, मिलनसार और परिवार पर जान छिड़कने वाले इंसान के तौर पर याद करते हैं; एक ऐसा शख़्स, जिसकी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा अपनी नौकरी और अपने अज़ीज़ों व बेटी के साथ ही गुज़रता था। उनकी ख़ुशमिज़ाजी और ज़िंदादिली भी उन्हीं पारिवारिक महफ़िलों में साफ़ झलकती थी। ८ जनवरी २०२६ की शाम (१८ दी १४०४), सड़कों पर उतरने के शहज़ादा रज़ा पहलवी के देशव्यापी आह्वान के बाद, तेहरान अपनी सबसे पुरकशिश और तनावपूर्ण रातों में से एक से गुज़र रहा था। ईरान के तमाम शहरों में विरोध प्रदर्शनों के फैलने के साथ ही राजधानी की सड़कें भी अशांत थीं। अफ़सरिये मोहल्ले में भी सड़कें प्रदर्शनकारियों से खचाखच भरी हुई थीं और बढ़ते तनाव के साथ उस इलाके का माहौल और भी खौफ़न…
جاویدنام یاسر قندالی · پدر · افسریه تهران