अमर नायक हसन(यासीन) सोहराबी
जान गंवाना हसन(यासिन) सोहराबी 30 वर्ष में ईरान तेहरान मैदान-ए-इंक़लाब
लेखक: रूदाबेह
हसन (यासीन) सोहराबी, माज़ंदरान प्रांत के क़ायमशहर के रहने वाले एक ३० वर्षीय युवक थे। उनके दोस्तों और क़रीबियों ने उन्हें एक बेहद पुरअज़्म और लगनशील नौजवान के रूप में याद किया है, जो एक बेहतर ज़िंदगी संवारने और अपने कलात्मक सपनों को साकार करने की ख़ातिर क़ायमशहर छोड़कर तेहरान (इंक़ेलाब चौक के क़रीब) आ बसे थे। संगीत उनकी ज़िंदगी का एक अटूट हिस्सा था और वे इसमें आगे बढ़ना चाहते थे। वे एक स्वतंत्र रैपर के रूप में काम कर रहे थे और अपनी जान गंवाने से पहले उन्होंने तीन नग़्मे लिखे और रिकॉर्ड किए थे; ऐसी रचनाएँ जिन्हें रिलीज़ करने की उन्हें कभी मोहलत न मिल सकी और जो उनकी अधूरी निशानियों के तौर पर ही महफ़ूज़ रह गईं। ८ जनवरी २०२६ (१८ दे १४०४) की शाम, इंक़ेलाब चौक और तेहरान विश्वविद्यालय के आसपास, प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ सड़कों पर उतर आई थी। दूसरी तरफ़, हुकूमत के दमनकारी सुरक्षा बलों की कतारें लाठियों, बंदूकों और छर्रेदार हथियारों से लैस होकर जनता के सामने तैनात थीं; सड़कें उन बलों के घेरे में थीं जो इन विरोध-प्रदर्शनों को कुचलने के लिए मैदान में उतरे थे। यासीन इंक़ेलाब चौक के आसपास ही मौजूद थे। वे प्रदर्शनकारियों के बीच थे कि तभी पीछे से उन्हें गोली का निशाना बनाया गया। गोली सीधे उनके सिर में लगी और गहरे ज़ख़्म व बेतहाशा ख़ून बह जाने की वजह से उन्होंने दम तोड़ दिया। यासीन के मारे जाने क…
یاسین سهرابی · قائمشهر · میدان انقلاب · موسیقی رپ