अमर नायक ग़ुलामरेज़ा शेर
जान गंवाना ग़ुलामरेज़ा शीर 38 वर्ष में ईरान नजफ़ाबाद यज़दानशहर
लेखक: मेहरशीद
ग़ुलामरेज़ा शीर का जन्म २१ मार्च १९८७ (१ फरवरदीन १३६६) को हुआ था और वे इस्फहान के नजफ़ाबाद स्थित यज़दानशहर के रहने वाले थे। उनकी तीन बड़ी बहनें और तीन बड़े भाई थे, और वे परिवार में सबसे छोटे थे। उनके अज़ीज़ उन्हें एक खुशमिज़ाज, हँसमुख और ज़िंदादिल इंसान के तौर पर याद करते हैं; एक ऐसा इंसान जिसे अपनों के साथ मिल-बैठना और खुशियाँ मनाना पसंद था, और जो परिवार के सदस्यों के बीच कभी कोई मनमुटाव टिकने नहीं देता था। वे परिवार के जन्मदिवसों और ख़ास दिनों को कभी नहीं भूलते थे। उनके दो तकियाकलाम भी ज़िंदगी के प्रति उनके इसी नज़रिए और सोच को बयां करते थे: «इतनी हाय-तौबा मत करो, ज़िंदगी दो दिन की है» और «मुस्कुराओ, दुनिया इतनी कीमती नहीं कि इसके लिए परेशान हुआ जाए।» ग़ुलामरेज़ा की ज़िंदगी का एक बहुत बड़ा हिस्सा अपने परिवार, ख़ासकर अपनी माँ से जुड़ा हुआ था। उनकी माँ वृद्ध थीं और केवल वॉकर के सहारे ही चल-फिर पाती थीं। ग़ुलामरेज़ा ने ५ वर्षों तक उनकी सेवा-सुश्रूषा की और माँ की सर्जरी के बाद भी पूरी फ़िक्र और तवज्जो के साथ उनकी तीमारदारी करते रहे। माँ कभी अकेली न महसूस करें, इसलिए उन्होंने शादी नहीं की और अपनी ज़िंदगी और काम-काज को इस तरह ढाल लिया था ताकि वे हमेशा उनके साथ रह सकें। परिवार के लिए ग़ुलामरेज़ा का होना सिर्फ़ माँ की देखभाल तक ही सीमित नहीं था; वे ऐसे इंसान थे जिनकी मौजूदगी बहनों को ढाढ…
غلامرضا شیر · یزدانشهر · اصفهان