अमर नायक मोहम्मद रज़ा ख़ानी; वह नायक, जो दूसरों की ख़ातिर रुका रहा और खुद कभी लौटकर नहीं आया
जान गंवाना मोहम्मद रेज़ा ख़ानी क़मलीजे 18 वर्ष में ईरान करज कियानमेहर
लेखक: रूदाबेह
कुछ लोगों की ज़िंदगी भले ही मुख़्तसर होती है, लेकिन उनके कदमों के निशाँ इतने गहरे होते हैं कि उनके चले जाने के बरसों बाद भी वे अपने परिवार, दोस्तों और अवाम के दिलों में ज़िंदा रहते हैं। मोहम्मद रज़ा ख़ानी उन्हीं में से एक हैं; एक ऐसे नौजवान जिन्होंने केवल १८ साल की ज़िंदगी पाई, मगर इन्हीं १८ बरसों में उन्होंने दर्द झेला, संघर्ष किया, अपनी राह बनाई और दूसरों के लिए जिए। केरमानशाह प्रांत के हरसीन शहर के एक कुर्द नौजवान और अल्बोर्ज़ प्रांत के बाशिंदे, मोहम्मद रज़ा ख़ानी ९ जनवरी २०२६ (१९ दे १४०४) की शाम को करज के कियानमेहर इलाके में जन-आंदोलन के दौरान कमर में सीधी दो गोलियाँ लगने से अपनी जान गंवा बैठे। उन्हें अठारहवें साल में क़दम रखे अभी महज़ एक महीना और कुछ ही दिन हुए थे; यह वह उम्र होती है जो बहुतों के लिए ख़्वाबों का आगाज़ है, मगर उनके लिए उस रास्ते का अंजाम बन गई जिसे उन्होंने बेइंतहा मुश्किलात झेलते हुए तय किया था। मोहम्मद रज़ा की ज़िंदगी बचपन से ही दुश्वारियों से घिरी रही। वह अभी एक छोटे बच्चे ही थे कि उनके सर से पिता का साया उठ गया। परिवार अचानक एक बहुत बड़े ख़ालीपन के रूबरू आ खड़ा हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इन्हीं मुश्किलों के बीच उन्होंने खेल की राह चुनी; एक ऐसी राह जो उनके लिए महज़ दिल बहलाने का ज़रिया नहीं, बल्कि अपना मुस्तक़बिल संवारने का एक पुल थी। साँस फुला देने…
محمدرضا خانی · جاویدنامان ورزشکار · هرسین،کرمانشاه · کرج