अमर नायक मोहम्मद मोरादी

जान गंवाना मोहम्मद मोरादी 25 वर्ष में ईरान मशहद

लेखक: अनाहिता

उसकी सैन्य सेवा पूरी हुए अभी एक महीना भी नहीं बीता था। मोहम्मद बड़े उत्साह से अपने सैन्य सेवा समाप्ति कार्ड के आने की राह देख रहा था, ताकि वह अपनी ज़िंदगी के एक नए दौर में क़दम रख सके; एक ऐसा दौर, जिसके लिए उसने ढेरों योजनाएँ बनाई थीं और कई ख़्वाब संजोए थे। उसने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) इंजीनियरिंग में स्नातक किया था। मूल रूप से वह करमानशाह का रहने वाला था, लेकिन कई वर्षों से मशहद में रह रहा था। मोहम्मद महज़ २५ वर्ष का था और अपने परिवार की इकलौती संतान; एक ऐसा नौजवान जो खिलाड़ी था, दयालु, नेक-दिल और जिसके चेहरे पर हमेशा मुस्कान खिली रहती थी। उसके पिता ईरान-इराक़ युद्ध के घायल पूर्व-सैनिक थे और दिल के मरीज़ थे, और उसकी माँ एक सेवानिवृत्त शिक्षिका थीं। ९ जनवरी २०२६ (१९ दे माह १४०४) की शाम, मोहम्मद सड़क पर था और मशहद के इमामत क्षेत्र व वकील-आबाद बुलेवार्ड के नज़दीक, निहत्था होने के बावजूद, गोलियों का निशाना बन गया। गोलियाँ उसके पेट और पसलियों में लगीं और इन घावों की वजह से उसका अत्यधिक ख़ून बह गया। उसे मशहद के तालेक़ानी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी सर्जरी हुई। मोहम्मद ऑपरेशन का दर्द तो झेल गया, लेकिन अत्यधिक ख़ून बह जाने के कारण उसकी हालत नाज़ुक होती चली गई और वह कोमा में चला गया। उसे बचाने की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं और आखिरकार १० जनवरी २०२६ (२० दे माह १४०४) की सुबह, ज़ख़्मों की शि…

محمد مرادی · مهندس IT · وکیل آباد مشهد · تک فرزند

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