फ़रीद सैफ़ी ख़ोरज़ूक़ी; वह पिता जिसने अपने तिड़वा बच्चों को कभी नहीं देखा

जान गंवाना फ़रीद सैफ़ी ख़ोरज़ूक़ी 36 वर्ष में ईरान इस्फ़हान ख़ोरज़ूक़

लेखक: नारीना

छत्तीस वर्षीय फ़रीद सैफ़ी ख़ोरज़ूक़ी को ८ जनवरी २०२६ (१८ दे १४०४) को ख़ोरज़ूक़ में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सशस्त्र बलों ने गोली मार दी। वली-ए-अस्र बुलेवार्ड में, बेहदारी गली के सामने, पुलिस थाने की इमारत की छत से एक सरकारी सुरक्षाकर्मी ने सीधे उनके सीने पर असली गोली दाग दी। फ़रीद को फ़ौरन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन ज़ख़्म इतने गहरे थे कि वे बच न सके। उन्होंने वहीं दम तोड़ दिया। गुरुवार, १५ जनवरी २०२६ (२५ दे १४०४) को ख़ोरज़ूक़ बोरख़्वार में उनके पार्थिव शरीर को सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया। फ़रीद भवन निर्माण नक़्शानवीस (ड्राफ़्ट्समैन) के रूप में काम करते थे। वे काग़ज़ पर बड़ी नफ़ासत से लकीरें खींचते और इमारतों की रूपरेखा तराशते थे। उनकी ज़िंदगी एक बहुत बड़े मोड़ की दहलीज़ पर खड़ी थी; उनकी पत्नी तीन जुड़वाँ बच्चों की माँ बनने वाली थीं और फ़रीद मार्च-अप्रैल २०२६ (फ़रवरदीन १४०५) में पहली बार पिता बनने वाले थे। वे बेहद उत्साह के साथ इस बारे में बातें करते और अपने तीनों नन्हे बच्चों के लिए उम्मीदों और हौसलों से भरा मुस्तकबिल संजोते थे। मगर फ़रीद उस फ़रवरदीन को न देख सके। उनके तीनों बच्चे बिना पिता के इस दुनिया में आए। ऐसे तीन मासूम बच्चे, जो कभी अपने पिता की महक महसूस नहीं कर पाएँगे, कभी उनके घर लौटने की आहट नहीं सुन पाएँगे, और जिन्हें सिर्फ़ अपनी माँ की सुनाई कहानियों और तस्वीरों के…

فرید سیفی خورزوقی · اصفهان · پدر سه قلوها · خورزوق اصفهان

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