अमर नायक मेहरदाद रेहानी
जान गंवाना मेहरदाद रेहानी 37 वर्ष में ईरान इस्फ़हान शहरज़ा
लेखक: रूदाबेह
मेहरदाद रेहानी, ३७ वर्ष, अलीरेज़ा के बेटे, तुर्क-क़शक़ाई नागरिक और इस्फहान प्रांत के शहरज़ा के रहने वाले थे; छह महीने की एक नन्ही बच्ची के पिता। एक ऐसे शख़्स जो अपने परिवार के साथ मिलकर समनू बनाकर ज़िंदगी बसर करते थे; वह समनू जो हर साल नौरोज़ के क़रीब लोगों के घरों तक पहुँचता था और अपने साथ शहर की नौरोज़ी रिवायत और ख़ुशबू का एक हिस्सा ले जाता था। गुरुवार की शाम, ८ जनवरी २०२६ (१८ दे १४०४) को शहरज़ा विरोध-प्रदर्शनों की तपिश में झुलस रहा था। मेहरदाद भीड़ के बीच मौजूद थे। मगर उस रात वह सिर्फ़ एक प्रदर्शनकारी भर नहीं थे। शहरज़ा के सज्जाद अस्पताल के सामने, अफ़रातफ़री और ख़ौफ़ के दरमियान, एक ज़ख़्मी लड़की ज़मीन पर बेसुध पड़ी थी। मेहरदाद उसे बचाने के लिए आगे बढ़े; इस उम्मीद में कि शायद उस बेपनाह तशद्दुद के बीच से उसे किसी महफ़ूज़ जगह पहुँचा सकें। लेकिन वह ख़ुद गोली का निशाना बन गए; एक गोली जो सीधे उनके पेट में जा धँसी। उसी छलनी बदन के साथ, गिरते-पड़ते वह बिलाल सड़क तक पहुँचे; बेहद भारी और लड़खड़ाते क़दम, जबकि बहता ख़ून और दर्द हर लम्हा उनकी बची-खुची ताक़त छीन रहा था। मगर वहाँ भी नजात की कोई राह उनका इंतज़ार नहीं कर रही थी। हुकूमती कारिंदों ने रास्ता रोक रखा था और मेहरदाद, लहूलुहान और बेसहारा, उनके घेरे में फँस गए। उनके और उस हथियारबंद कारिंदे के बीच महज़ आधा मीटर का फ़ासला था। इतने क़रीब स…
مهرداد ریحانی · اصفهان · شهرضا · ترک قشقایی