अमर नायक सईद अज़ीज़ी
जान गंवाना सईद अज़ीज़ी 37 वर्ष में ईरान सावेह ज़ंजानी सड़क
लेखक: नफ़स
सावेह के रहने वाले सईद अजीज़ी ३७ वर्ष के थे। वे दो बेटियों के पिता थे; एक ७ साल की और दूसरी ९ साल की। किसी ज़माने में वे एक सुपरमार्केट के मोटर-डिलीवरी बॉय थे। बाद में वे एक प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी के मालिक बन गए। उनका जीवन, अपनी पीढ़ी के तमाम मर्दों की तरह, सादगी और कड़ी मेहनत से भरा था; काम, परिवार और दो मासूम बेटियाँ जो काम से उनके लौटने की राह तकती थीं। ९ जनवरी (۱۹ दी) को, जब यह ख़बर पहुँची कि ईरान के अलग-अलग शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं, तो सईद ने भी अपने तमाम शहरवासियों की तरह प्रदर्शनकारियों से जुड़ने का फ़ैसला किया। जाने से पहले, उनके पिता ने चिंता जताते हुए कहा था : «सईद जान, मत जाओ बेटा... बाकी लोगों को जाने दो। तुम्हें जाने की क्या ज़रूरत है?» सईद ने अपने पिता की ओर देखा और कहा: «बाबा, हम सबको जाना होगा। अगर मैं न जाऊँ तो कौन जाएगा? आपको भी साथ चलना चाहिए।» यह एक सादा-सा वाक्य था, मगर इसमें ज़िम्मेदारी का वह अहसास छिपा था जो उन्हें घर से बाहर खींच लाया; एक ऐसा अहसास जो उनसे कह रहा था कि अगर सब यूँ ही खड़े होकर देखते रहे, तो कुछ भी नहीं बदलेगा। उसी शाम, सावेह की ज़ंजानी सड़क पर, एक गोली उनकी कनपटी पर जा लगी। सईद उसी सड़क पर, जहाँ वे अपने और अपने देशवासियों के हक़ की हिफ़ाज़त के लिए उतरे थे, दम तोड़ गए। रात के लगभग १० बजे, ठीक उसी वक्त जब परिवार रात के खाने का दस्तरखान…
سعید عزیزی · جاویدنام های ساوه · ساوه