अमर नायक अरमान आबेदमक़ामी; पापा... मैं जल गया
जान गंवाना आर्मान आबेदमक़ामी 35 वर्ष में ईरान गिलान रश्त की यख़साज़ी सड़क
लेखक: सफ़र
गिलान के रश्त में यख़-साज़ी मार्ग के रहने वाले अरमान आबेदमक़ामी ३५ वर्ष के थे, जिनका जन्म २७ अक्टूबर १९९० (५ आबान १३६९) को हुआ था। वे एक अविवाहित नौजवान थे, जिनके ज़हन में आने वाले सालों के लिए अनगिनत ख़्वाब पल रहे थे। भविष्य को लेकर वे इस क़दर पुरउम्मीद थे कि अक्सर अपने करीबियों से कहा करते थे: «मैं तो ९० साल तक जीने वाला हूँ।» हर नौजवान की तरह अरमान के भी अपने सपने थे; मगर उन सब में एक ख़्वाहिश उनके दिल के सबसे क़रीब थी: एक कैफ़े-रेस्तरां शुरू करने की। एक ऐसी जगह, जो उनके सपनों और उनकी मेहनत का हासिल बनने वाली थी; एक ऐसा मुक़ाम, जहाँ से उन्हें उस मुस्तक़बिल की नींव रखनी थी जिसे शुरू करने की अभी उन्हें मोहलत भी नहीं मिल पाई थी। मगर ९ जनवरी (१९ देई) की रात सब कुछ बदल गया। विरोध-प्रदर्शनों की दूसरी रात, तक़रीबन रात आठ बजे अरमान घर से निकले। कुछ घंटों बाद, क़रीब रात दस बजे के आसपास फ़ोन संपर्क कट गया और परिवार का उनसे कोई राब्ता न हो सका। चिंता और बेचैनी में कई घंटे बीत गए, यहाँ तक कि रात तक़रीबन एक बजे जब संपर्क फिर बहाल हुआ, तो अरमान ने घरवालों को फ़ोन करके बताया कि वे घर लौट रहे हैं। लेकिन वे फिर कभी घर न पहुँच सके। अरमान के घर के पास ही बासिज का एक ठिकाना था, जहाँ से प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ बरसाई जा रही थीं। रश्त के यख़-साज़ी चौराहे पर अरमान दो जंगी गोलियों का निशाना बन…
آرمان عابدمقامی · خیابان یخسازی · رشت