अमर नायक माहान सादेक़ी
जान गंवाना माहान सादेक़ी 20 वर्ष में ईरान तेहरान हफ़्त-हौज़
लेखक: मेहरशीद
माहान सादेक़ी ने अपनी किशोरावस्था का एक बड़ा हिस्सा मेहनत-मज़दूरी करते हुए बिताया। बचपन से ही उनके सिर पर पिता का साया नहीं था और परिवार की तंगहाली के चलते वे अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सके। वे बहुत छोटी उम्र में ही काम की दुनिया में उतर पड़े; कुछ अरसे तक एक खराद (लेथ मशीन) की दुकान पर काम किया और बाद में मोटरसाइकिल ही उनकी रोज़ी-रोटी का ज़रिया बन गई। कभी वे डिलीवरी बॉय के तौर पर तो कभी स्नैप के ज़रिए काम करते थे; एक ऐसी आमदनी जिससे परिवार के ख़र्चों का कुछ सहारा बन जाता था। काम की इस जद्दोजहद से भरी ज़िंदगी के साथ-साथ, यारी-दोस्ती माहान की ज़िंदगी का एक बेहद ख़ास हिस्सा थी। उनके निजी जीवन की बची हुई ढेरों तस्वीरों में माहान अपने दोस्तों के बीच ही घिरे नज़र आते हैं; नौजवानों की वह आत्मीय महफ़िलें, जिनसे उनके दिनों की रौनक़ बनी थी। उनके दोस्त उनके मिलनसार, ख़ुशमिज़ाज और नेकदिल स्वभाव को याद करते हैं और उन्हें एक बेहद बामुरव्वत और वफ़ादार नौजवान के रूप में याद करते हैं। माहान २४ नवंबर २०२५ (३ आज़र १४०४) को अपनी ज़िंदगी के बीसवें साल में दाख़िल हुए; एक ऐसी बीस साला ज़िंदगी, जो महज़ ४५ दिन ही और चल सकी। ८ जनवरी (१८ देई) की शाम, माहान तेहरान के हफ़्त-हौज़ चौक के इलाक़े में मौजूद थे; उन जगहों में से एक, जो उस रात के भारी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी और उन पर बरपे ज़ु…
ماهان صادقی · تهران · نارمک