अमर नायक ताहा सुलेमानी; शोक-संतप्त माताओं की आह से डरो

जान गंवाना ताहा सुलेमानी 18 वर्ष में ईरान तेहरान आर्याशहर

लेखक: कोहन

आठ साल का इंतज़ार आखिरकार दो बच्चों के जन्म पर पूरा हुआ; ऐसे जुड़वां बच्चे जो एक साथ इस दुनिया में आए थे और जिन्हें ज़िंदगी के कई साल एक-दूसरे के साथ गुज़ारने थे। मगर जनवरी २०२६ (दे १४०४) में तक़दीर ने दोनों को जुदा कर दिया; एक रह गई और दूसरा उन्नीस साल का होने से पहले ही हमेशा-हमेशा के लिए उसकी ज़िंदगी से चला गया। उन जुड़वां भाई-बहन के एक जन्मदिन का वीडियो बचा हुआ है। गहरे नीले रंग के फ़ितों से सजा एक सफ़ेद केक और पास रखा सफ़ेद फूलों का गुलदस्ता। सिर पर टोपी और बदन पर सफ़ेद हुडी पहने ताहा अपनी जुड़वां बहन के साथ नाच रहा है। ताहा माज़ंदरान का रहने वाला था और दिखावे या तकल्लुफ़ात से दूर भागता था। अगर कोई उसे «आक़ा ताहा» कहकर पुकारता, तो वह फ़ौरन टोक देता: «सिर्फ़ ताहा, आक़ा ताहा नहीं।’ वह रैप सुनता था, पर्सेपोलिस फ़ुटबॉल क्लब का मुरीद था और उसे बिल्लियाँ बहुत पसंद थीं। उसकी जो तस्वीर बची है, उसमें वह कैमरे की तरफ़ देखकर मुस्कुरा रहा है। एक दूसरी तस्वीर में वह आईने के सामने अपनी बहन के पास खड़ा है, कद में उससे लंबा, गहरे रंग की स्वेटशर्ट पहने और एक हाथ जेब में डाले हुए। ८ जनवरी २०२६ (१८ दे ۱۴۰४) की शाम को वह शहज़ादा रज़ा पहलवी के प्रदर्शनों में शामिल होने के आह्वान पर घर से निकला और तेहरान के आर्याशहर पहुँचा—जहाँ लोग आज़ादी की ख़ातिर उमड़ पड़े थे और उनकी आवाज़ें फ़ायरिंग की गूँज और आ…

طاها سلیمانی · تهران · شاهزاده رضا پهلوی · آریاشهر

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