अमर नायक अहमदरेज़ा अमानी
जान गंवाना अहमदरेज़ा अमानी 28 वर्ष में ईरान Azna
लेखक: कतायून
अहमदरज़ा अमानी अपने परिवार से मिलने यज़्द से अज़ना लौटे थे; एक ऐसा सफ़र जो महज़ एक छोटी-सी मुलाक़ात के लिए तय हुआ था, मगर अपनी जन्मभूमि में उनकी आख़िरी वापसी साबित हुआ। वह अट्ठाईस वर्ष के थे, उन्होंने यज़्द विश्वविद्यालय से विधि की शिक्षा प्राप्त की थी और यज़्द बार एसोसिएशन में वकालत के प्रशिक्षण का दूसरा चरण पूरा कर रहे थे। बरसों के अध्ययन के बाद, अब जाकर उन्हें अपने सीखे हुए ज्ञान को प्रयोग में लाने और अपने पेशेवर जीवन की राह संवारने का अवसर मिला था। उन्होंने अभी विवाह नहीं किया था और जीवन के अनगिनत अनछुए रास्ते उनके सामने थे। जनवरी २०२६ (दी १४०४) में, ईरान के कई अन्य शहरों की तरह अज़ना भी अशांत था। कमरतोड़ महँगाई, बेरोज़गारी और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के ख़र्च उठाने की विवशता ने लोगों को सड़कों पर ला खड़ा किया था। बहुत-से नौजवान रोज़गार की तलाश में अपने शहर और परिवार से दूर जाने को मजबूर थे, जबकि भविष्य को लेकर कोई उम्मीद नहीं बची थी। इन तमाम दबावों के बीच, व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं पर बंदिशें और गिरफ़्तारी व दमन का ख़ौफ़ भी हर पल बना हुआ था। गुरुवार, १ जनवरी २०२६ (११ दी) को अज़ना के लोग इन्हीं बदतर हालात के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए जमा हुए। फ़रमानदारी चौराहे के पास यह प्रदर्शन आजीविका से जुड़े नारों के साथ शुरू हुआ, लेकिन हुकूमत के सुरक्षाबलों ने इसका जवाब आँसू गैस और गोलियों की बौ…
احمد رضا امانی · ازنا · وکیل دادگستری · یزد