अमर नायक मोबीन क़नबरी; मैं आ गई मेरे मोबीन, माँ आ गई
जान गंवाना मुबीन क़नबरी 22 वर्ष में ईरान Tehran
लेखक: मेहरशीद
मोबीन क़नबरी, खोय के रहने वाले २२ वर्षीय फ़ुटबॉल खिलाड़ी और पेकन की यूथ (उम्मीद) टीम के खिलाड़ी, एक बेहद कर्मठ और ज़िम्मेदार नौजवान थे, जो मेहनत और उम्मीद के सहारे ज़िंदगी में आगे बढ़ रहे थे। अपने भविष्य को संवारने के लिए वह कभी थकते नहीं थे; तेहरान की सर्दी और गर्मी में वह सड़क किनारे रेहड़ी लगाते और घंटों चौराहे पर खड़े रहते ताकि हलाल की रोज़ी कमा सकें। मोबीन ने हाल ही में अपनी अनिवार्य सैन्य सेवा पूरी की थी और तेहरान के अफ़सरियेह इलाक़े में काम कर रहे थे। एक ऐसा नौजवान, जो फ़ुटबॉल के मैदान में अपने सपनों के पीछे दौड़ता था और ज़िंदगी में भी एक बेहतर मुस्तक़बिल बनाने की जद्दोजहद कर रहा था, बिना यह जाने कि ज़िंदगी जीने के लिए उसके पास बहुत कम वक़्त बचा था। गुरुवार, ९ जनवरी (१९ देय) को, तेहरान में जन-विरोध प्रदर्शनों के दौरान, मोबीन इस्लामिक गणराज्य के दमनकारी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में घायल हो गए। उसी रात, गोली लगने के बावजूद उन्होंने अपनी माँ को फ़ोन किया और कहा: "माँ, मुझे गोली लगी है, लेकिन डरो मत, बस छर्रे हैं, मैं बिल्कुल ठीक हूँ।" उनकी माँ, राहेलेह ने बाद में बताया कि उन्होंने जितनी बार भी बेटे को क़सम दिलाई, मोबीन यही दोहराते रहे: "माँ की क़सम, बस छर्रे लगे हैं..." मगर उनके नौजवान जिस्म में जो धंसी थी, वह कोई छर्रे नहीं थे; बल्कि असली गोली थी। मोबीन अपनी माँ की राह देख रहे…
مبین قنبری · فوتبالیست · خوی · دستفروش