सज्जाद अरदूनी कवीर; चमत्कार

जान गंवाना सज्जाद अर्दूनी कवीर 20 वर्ष में ईरान सब्ज़ेवार मोतहरी

लेखक: ज़ाल

मैं सज्जाद ओरदूनी कवीर हूँ। मेरी ज़िंदगी मेहनत-मशक़्क़त और आने वाले कल की उम्मीदों के सहारे बीत रही थी, और मैं उस दिन के ख़्वाब को पूरा करने में जुटा था जब मेरा अपना कोई काम-कारोबार हो। मैं गाड़ियों की डेंटिंग का काम करता था—एक ऐसा हुनर, जिसमें बड़ी बारीकी और सब्र से काम लेना पड़ता था। मैं हादसों में मुड़ी-तुड़ी गाड़ियों की चादरों को फिर से शक्ल देता, और चोट खाकर बिगड़ी हुई चीज़ों को दोबारा पहले जैसा सँवारने की कोशिश करता। मैं काम करते हुए कभी थकता नहीं था। मुझे मालूम था कि अपनी मुरादों को पाना आसान नहीं, लेकिन मैं इस इंतज़ार में हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठना चाहता था कि कोई दूसरा आकर मेरा मुस्तक़बिल संवारे। मैंने अलग-अलग जगहों पर काम करके तजुर्बा हासिल किया था, और जितना सीखता जाता, उस दिन का ख़्याल उतना ही गहरा होता जाता जब मैं अपने दम पर काम कर सकूँ। यहाँ तक कि मैंने अपनी दुकान का नाम भी चुन रखा था: «मोज़ेज़ा»। मेरी दिली ख़्वाहिश थी कि एक दिन अपनी दुकान के माथे पर इसी नाम का तख़्ता लगाऊँ। एक ऐसी जगह, जो मेरे बरसों के पसीने और हुनर का फल हो, और जहाँ की कमाई से मैं अपनी पसंद की ज़िंदगी संवार सकूँ। शादी करना भी मेरी आरज़ुओं में से एक था। मैं अक्सर उस आने वाले कल के सपने देखता था, जिसमें मेरा अपना एक परिवार हो और काम-काज के साथ-साथ एक पुरसुकून ज़िंदगी गुज़रे। लेकिन उस मुक़ाम तक पहुँचने स…

سبزوار · سجاد اردونی کویر · نراتا

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