अमर नायक सईद पनाही
जान गंवाना सईद पनाही 29 वर्ष में ईरान करज गोहरदश्त
लेखक: जावेद
सईद पनाही, २۹ वर्ष, सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक थे। वह उन युवाओं में से थे जिनके पास अपने भविष्य के लिए स्पष्ट योजनाएँ थीं; एक ऐसी पीढ़ी, जिसने वर्षों तक पढ़ाई की, सपने संजोए और उस आने वाले कल पर निगाहें टिकाए रखीं जो उनकी मेहनत का फल बनने वाला था। लेकिन वह कल कभी आ ही न सका। जो लोग सईद को जानते थे, वे सब से बढ़कर उनके दयालु स्वभाव को याद करते हैं। उनका दिल बेहद कोमल था और यह दयालुता वे सिर्फ़ इंसानों पर ही न्योछावर नहीं करते थे। बिल्लियाँ उनके लिए जानी-पहचानी जीव थीं; जहाँ भी वे किसी बेसहारा जानवर को देखते, अनदेखा करके आगे नहीं बढ़ते थे। वे उसके लिए खाना ले जाते, उसे पुचकारते और उनका यह अटूट विश्वास था कि ज़िंदगी चाहे जिस भी रूप में हो, देखभाल की हक़दार है। ८ जनवरी २०२६ (१८ देई १४۰۴) को, करज के गोहरदश्त में सईद इस्लामिक गणराज्य के दमनकारी बलों की सीधी गोलीबारी का निशाना बने। घातक गोलियाँ उनकी गर्दन और पहलू में जा लगीं। लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुँचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन ज़ख्म इतने गंभीर थे कि उनके जीवन की वापसी का कोई मौक़ा ही न बचा। उनकी शहादत के बाद, परिवार को उनके पार्थिव शरीर को सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए भी बंदिशों और दबावों का सामना करना पड़ा, और आखिरकार उन्होंने सईद को करज के आतिशगाह गांव में दफना दिया। इस दास्तान का सबसे दर्दनाक अध्याय पांच दिन बाद शुरू हुआ। सईद के…
سعید پناهی · گوهردشت · کرج