अमर नायक यासिर मजीदी
जान गंवाना यासिर मजीदी 20 वर्ष में ईरान अराक
लेखक: अनाहिता
यासिर मजीदी की उम्र महज़ बीस साल थी। वह अराक विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान का द्वितीय वर्ष का छात्र था। यासिर एक होनहार छात्र था और उसने अपने भविष्य के लिए बड़े सपने संजो रखे थे। उसका लक्ष्य था कि वह रसायन विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त करे और एक दिन इसी विषय में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल करे। पढ़ाई और विश्वविद्यालय के साथ-साथ, वह अपनी ज़िंदगी और तालीम के ख़र्चों का एक हिस्सा ख़ुद जुटाने का प्रयास करता था। गर्मियों में वह मज़दूरी करता था और अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कोई भी काम करने से कभी पीछे नहीं हटता था; वह अपनी पढ़ाई का ख़र्च ख़ुद उठाना चाहता था ताकि उसके परिवार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। यासिर अभी अविवाहित था; महज़ बीस बरस का एक नौजवान, जिसके भविष्य के अनगिनत सपने और मंसूबे हमेशा के लिए अधूरे रह गए। उसकी याद के रूप में बचे एक वीडियो में यासिर नाचता हुआ दिखाई देता है; उन सादी-सी ख़ुशियों और हसीन लम्हों की एक जीती-जागती तस्वीर, जो उसने अपने परिवार के साथ बिताए थे। लेकिन ८ जनवरी २०२६ (१८ दी १४०४) की शाम सब कुछ हमेशा के लिए बदल गया। बृहस्पतिवार की शाम, ८ जनवरी २०२६ (१८ दी १४०४) को यासिर अराक की क़ायम-मक़ाम सड़क पर मौजूद था। सामने आई जानकारियों के अनुसार, जब वह दमनकारी सुरक्षा बलों के घेरे में फँसी एक लड़की को बचाने के लिए आगे बढ़ा, तो पहले लाठियों से पीट-पीटकर उसक…
دانشجو · اراک · یاسر مجیدی