अमर नायक अश्कान मालेकी; सब्ज़ी मंडी से फ़ांसी के फंदे तक
फांसी अश्कान मालेकी 37 वर्ष में ईरान तेहरान
लेखक: साये
अश्कान मालिकी उन इंसानों में से एक थे जिनका जीवन ख़ामोशी और निरंतर प्रयास में बीता; कुर्दिस्तान की सरज़मीं का एक ऐसा शख़्स, जो ताक़त या दौलत से नहीं, बल्कि अपनी कड़ी मेहनत और काम से पहचाना जाता था। वह क़ुरवे के रहने वाले थे; एक ऐसा शहर जहाँ उनके बचपन और जवानी के दिन बीते और वे अभावों व मुश्किलों के बीच बड़े हुए। एक बेहतर ज़िंदगी की तलाश में अश्कान ने अपना वतन छोड़ दिया और तेहरान का रुख़ किया। तमाम प्रवासी मज़दूरों की तरह, अश्कान ने भी रोज़गार के मौक़ों की तलाश में राजधानी को चुना। वह तेहरान की सब्ज़ी मंडी में काम करते थे; एक बेहद कठिन और दिन-रात की मशक्कत वाला काम, जिसका हासिल सिर्फ़ अपने परिवार की गुज़र-बसर था। उनकी उम्र ३७ साल थी; वे शादीशुदा थे और दो बच्चों के पिता थे—एक ११ साल की बेटी और एक ९ साल का बेटा। उनकी पढ़ाई महज़ तीसरी कक्षा तक हुई थी, लेकिन ज़िंदगी ने उन्हें बड़े कठिन सबक़ सिखाए थे—सब्र, मेहनत और सहनशीलता के सबक़। तेहरान में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान अश्कान की क़िस्मत ने मोड़ लिया। ९ जनवरी २०२६ (१९ दी १४०४) की शाम, प्रदर्शनों के बीच, तेहरान के कोए-ए नस्र (गीशा) स्थित जाफ़री मस्जिद में आगजनी की घटना हुई; एक ऐसा हादसा जिसने आगे चलकर अश्कान मालिकी के नाम को एक न्यायिक मामले से जोड़ दिया। गिरफ़्तारी के बाद, अश्कान का परिवार उनकी ख़बर लेने में जुट गया। उन्होंने कई बार उनके…
اشکان مالکی · کارگر · شهروند کورد