अमर नायक सैयद मोहम्मद हाशमी हरिकंदेह
जान गंवाना सैयद मोहम्मद हाशमी हरिकंदेह 20 वर्ष में ईरान बबल
लेखक: मेहरशीद
सैयद मोहम्मद हाशमी बाबोल ज़िले के हरीकंदेह गाँव के रहने वाले थे, जिनका जन्म २६ मार्च २००५ (६ फ़रवरदीन १३८४) को हुआ था। वे २० वर्ष के थे और उनके २१वें जन्मदिन में तीन महीने से भी कम का वक़्त बचा था। उनका एक बड़ा भाई और एक बड़ी बहन थी, और उन्होंने हाल ही में अपनी अनिवार्य सैन्य सेवा पूरी की थी। सेना के दिन उनके लिए अपनों से दूरी और मुश्किलों से भरे रहे थे; जब भी वे छुट्टी पर घर आते तो वहाँ की कठिनाइयों का ज़िक्र करते, और जब कभी उनके पास मोबाइल फ़ोन नहीं होता, तो घरवाले कई-कई दिन उनकी ख़ैर-ख़बर के बिना बेचैनी में काटते थे। सैन्य सेवा समाप्ति का प्रमाणपत्र मिलना मोहम्मद के लिए उन कठिन दिनों का अंत था, और इस बात की उनकी ख़ुशी उनसे जुड़ी यादों में साफ़ नज़र आती है। लोग मोहम्मद को एक शांत, थोड़े शर्मीले, नेकदिल और सादगी-पसंद नौजवान के रूप में याद करते हैं, मगर फ़ुटबॉल को लेकर उनका जुनून देखने लायक था। मैच देखने के लिए वे खाने-पीने की चीज़ें ले आते और टीवी के सामने जम जाते; जब गोल नहीं होता तो झुँझला उठते, और जब गोल हो जाता तो उनकी ख़ुशी से पूरा घर गूँज उठता था। उनकी बहन ने सोशल मीडिया पर लिखी एक पोस्ट में उन पलों को याद किया है जब मोहम्मद ख़ुशी के मारे उन्हें गले से लगा लेते थे और दोनों इतनी ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते थे कि पिता को टोकना पड़ता था कि ज़रा धीमे बोलो, और फिर दोनों खिलखिला कर हँस…
سید محمد هاشمی · هریکندی · بابل