अमर नायक अबुलफ़ज़ल पालिज़ी; हिरणों के लिए एक हौज़ से लेकर अधूरे सपनों तक
जान गंवाना अबोलफ़ज़्ल पालीज़ी 22 वर्ष में ईरान उत्तरी ख़ुरासान जाजर्म
लेखक: अनाहिता
अबुलफ़ज़ल का जन्म २१ अगस्त २००३ (३० मोरदाद १३८२) को उत्तरी ख़ुरासान प्रांत के जाजरम गाँव में हुआ था। उसने हाल ही में अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की थी और वह आगे पढ़ना चाहता था, लेकिन भविष्य के अपने सपनों के साथ-साथ, रोज़ी-रोटी कमाने के लिए वह मज़दूरी भी करता था और एक खदान में काम में जुटा हुआ था। अबुलफ़ज़ल को जानवरों से बेहद लगाव था और इसी लगाव ने उसके दिल में वन्यजीव रक्षक बनने का ख़्वाब जगाया था। वह अपनी पढ़ाई आगे जारी रखना चाहता था ताकि किसी दिन वन्यजीव रक्षक बन सके और कुदरत व उन बेज़ुबान जानवरों की देखभाल कर सके जिनसे वह बेपनाह मोहब्बत करता था। अबुलफ़ज़ल की बहन ने अपनी एक याद साझा करते हुए जानवरों के प्रति उसके गहरे लगाव का ज़िक्र किया है। उसे याद है कि एक रोज़ अबुलफ़ज़ल ने उससे कहा था: «दीदी, जब मैं खोके से ज़मीन खोदता हूँ, तो पानी निकल आता है। फिर मैं अपने हाथों से छोटा-सा कुंड बना देता हूँ ताकि हिरण, खरगोश और कबूतर वहाँ आकर अपनी प्यास बुझा सकें।» यह एक सादी सी याद है, जो यह बतलाती है कि जानवरों के लिए अबुलफ़ज़ल का यह प्यार महज़ मुस्तक़बिल का कोई ख़्वाब नहीं था; वह मज़दूरी के उन थका देने वाले दिनों में भी जानवरों के पानी पीने की फ़िक्र किया करता था। प्रकृति और जानवरों के अलावा, अबुलफ़ज़ल को मोटरसाइकिलों का भी ज़बरदस्त शौक़ था और ख़ास तौर पर हज़ार सीसी वाली सुपरबाइक्स उसे बहुत पसंद…
ابوالفضل پالیزی · محیط بان · کارگر معدن · جاجرم خراسان شمالی