अमर नायक कियानोश लोत्फ़ी-निया; ३६ दिनों बाद मिला

जान गंवाना कियानूश लुत्फ़िनिया 46 वर्ष में ईरान करज एश्तेहार्द

लेखक: जावेद

अमर नायक कियानूश लोत्फ़ी-निया, ४६ वर्ष जिए; अपनी उन तमाम उम्मीदों, थकानों, कोशिशों और उन सादे पलों के साथ, जिनके बारे में उन्होंने शायद कभी सोचा भी न होगा कि वे एक दिन ऐसी कड़वी और अनगिनत सवालों से घिरी याद में बदल जाएँगे। एक ऐसा इंसान जो अपनों से दूर, परदेस की खामोशी में मेहनत-मशक्कत करता और अपनी ज़िंदगी की गाड़ी आगे बढ़ाता रहा; इस बात से बेख़बर कि उसकी तक़दीर का तार ऐसे अंजाम से जुड़ जाएगा। गुरुवार, ८ जनवरी २०२६ (१८ दी १४०४) को शहज़ादे रज़ा पहलवी ने लोगों से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया था और यह विरोध प्रदर्शन शुक्रवार, ९ जनवरी २०२६ (१९ दी १४०४) को भी जारी रहा। उसी दिन से कियानूश का फ़ोन बंद हो गया और परिवार दोबारा कभी उनसे संपर्क नहीं कर सका। ३६ दिनों की बेख़बरी; ३६ ऐसे दिन जिनका हर एक लम्हा उनके परिवार के लिए एक पूरी उम्र की तरह बीता। वे आँखें जो दरवाज़े पर ही टिकी रह गईं, फ़ोन की हर घंटी पर धड़क उठते दिल, और वह उम्मीद जो हर गुज़रते दिन के साथ धुँधली तो पड़ती गई मगर कभी बुझी नहीं। यहाँ तक कि आख़िरकार ख़बर आई, मगर वह नहीं जिसका दिलों को इंतज़ार था; बल्कि एक बेहद भारी, सर्द और सन्नाटे से भरी अनसुलझी ख़बर। क़रीब ३६ दिन बीत जाने के बाद उन्हें पता चला कि उनका पार्थिव शरीर कहरीज़क के फ़ॉरेंसिक मेडिसिन सेंटर में है; हफ़्तों के इंतज़ार के बाद आई यह ख़बर उस उम्मीद से कोसों दूर थी, जो…

کیانوش لطفی‌نیا · جاویدنامان تهران · جاویدنامان اندیمشک · انقلاب شیروخورشید

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