अमर नायक मेहरशाद शफ़ाई; तुम्हारी राह जारी है, मेरे अज़ीज़
जान गंवाना मेहरशाद शफ़ाई 21 वर्ष में ईरान सावेह
लेखक: नूरा
मेहरशाद शफ़ाई का जन्म सावेह में हुआ और वह वहीं पला-बढ़ा; गर्मियों के मौसम में जन्मा एक ऐसा लड़का, जो बेहद ज़हीन, हँसमुख और ज़िंदगी के जोश से लबरेज़ था। स्कूल के शुरुआती सालों से लेकर मिडिल स्कूल की पढ़ाई पूरी होने तक, वह हमेशा होनहार और मेधावी छात्रों में गिना जाता रहा, लेकिन जब अपने आगे की तालीम की राह चुनने का वक़्त आया, तो उसने अपनी पसंद से वोकेशनल स्कूल चुना। लड़कपन से ही उसे बख़ूबी मालूम था कि उसे क्या चाहिए, और अपने सपनों को पूरा करने के लिए वह कभी पीछे नहीं हटता था। ज़िंदादिली उसकी शख्सियत का अटूट हिस्सा थी; वह जहाँ भी जाता, अपने साथ हँसी और रौनक ले जाता, और बदतर से बदतर दिनों में भी अपने अपनों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने की कोई-न-कोई राह निकाल ही लेता था। मेहरशाद की किशोरावस्था उसके पिता की लंबी बीमारी के साए में बीती। पिता ने बरसों तक ब्लड कैंसर से कड़ा संघर्ष किया और आखिरकार साल २०२२ (१४०१) में दुनिया को अलविदा कह गए। उनके जाने के बाद, घर की पूरी ज़िम्मेदारी मेहरशाद के कंधों पर आ पड़ी; एक ऐसा नौजवान जो अभी खुद ज़िंदगी की दहलीज़ पर ही खड़ा था, मगर उसे पिता के चले जाने के खालीपन को भी संभालना था। वह अकाउंटेंसी के पाँचवें सेमेस्टर का छात्र था और साथ ही सेल्स प्रतिनिधि के तौर पर काम भी करता था। उसने हाल ही में अपनी एक गाड़ी खरीदी थी और पढ़ाई व नौकरी के साथ-साथ मुक्केबाज़ी भी…
مهرشاد شفائی · ساوه · دانشجوی نخبه ی حسابداری