अमर नायक अमीरहुसैन ख़ानदोज़ी; तुम्हारे इंतज़ार में, मोमबत्तियों के पास
जान गंवाना अमीरहुसैन ख़ान्दूज़ी 26 वर्ष में ईरान गोरगन
लेखक: सेपेहर
अमीरहुसैन ख़ानदोज़ी, गोलेस्तान प्रांत के फ़ेंदेरेस्क गाँव का रहने वाला २६ साल का एक नौजवान था। वह अविवाहित था और एक निजी कंपनी में काम करता था। जानने वाले उसे उसकी शालीनता और अदब के लिए पहचानते थे। हाल के वर्षों में उसने अपने पिता को खो दिया था और अब उसके सिर पर केवल अपनी माँ का ही स्नेहमयी साया था। साल २०२६ (१४०४) में उसके जन्मदिन से तीन दिन पहले, परिवार ने ८ जनवरी (१८ दे) के लिए एक सादा और आत्मीय जश्न तय कर रखा था। तय यह था कि अमीरहुसैन देर रात घर लौटेगा, वे केक लाएँगे, मोमबत्तियाँ जलाएँगे और सब मिलकर उसका जन्मदिन मनाएँगे। एक नन्हीं-सी ख़ुशी उनकी राह तक रही थी; उन्हीं ख़ुशियों में से एक, जिनका मोल पलों की सादगी और अपने अज़ीज़ों की मौजूदगी से होता है। किसी को क्या पता था कि वह रात इस परिवार की ज़िंदगी को 'पहले' और 'बाद' के दो हिस्सों में बाँट देगी; एक ऐसा फ़ासला, जिसे भरने की ताक़त अब किसी भी कैलेंडर में नहीं होगी। ८ जनवरी २०२६ (१८ दे १४०४) को, शहज़ादा रज़ा पहलवी के आह्वान के साथ ही, अमीरहुसैन ने भी गोर्गान के विरोध-प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। मगर परिवार की उम्मीदों के उलट, वह उस रात घर नहीं लौटा। इस्लामिक रिपब्लिक के दमनकारी सुरक्षाकर्मियों ने उसे गिरफ़्तार कर लिया और उसके बाद से, जो घर उसकी राह तक रहा था, वह बेख़बरी के घेरे में घिर गया। शुरुआत में यह इंतज़ार शायद किसी छोटी-सी ख़…
امیرحسین خاندوزی · فندرسک · گلستان · شکنجه