अमर नायक मिलाद शैदा-गमासाई; मलायर से तेहरान तक, ईरान पर जान न्योछावर
जान गंवाना मीलाद शैदागोमासाई 28 वर्ष में ईरान तेहरान याफ़्त आबाद
लेखक: रूदाबेह
मिलाद शैदा गमासाई का जन्म २८ दिसंबर १९९७ (७ दे १३७६) को मलायर में हुआ था; वह नौजवान जो बाद में मार्लिक में बस गया और स्नोवा कंपनी में काम करता था। वह अट्ठाइस वर्ष का था और उसकी सगाई को अभी महज़ तीन महीने ही गुज़रे थे; यह एक नया घर बसाने, भविष्य की योजनाएं संजोने और उन अनछुए दिनों को आकार देने की शुरुआत हो सकती थी जो अभी आने बाक़ी थे। लेकिन वह भविष्य, उनकी कल्पना से कहीं ज़्यादा मुख़्तसर साबित हुआ। ९ जनवरी २०२६ (१९ दे १४०४) की शाम, तेहरान के याफ़्ताबाद इलाके में मिलाद को गोलियों का निशाना बनाया गया। पीछे से उसे दो गोलियां लगीं और वहीं, तेहरान की सड़कों के बीच, उस नौजवान की ज़िंदगी का सफ़र हमेशा के लिए थम गया, जो अभी अपनी ज़िंदगी के एक नए दौर की दहलीज़ पर ही खड़ा था। मगर उसके अपनों के लिए, यह अंजाम अब भी पर्दों में छुपा था। उन्हें गोलीबारी की ख़बर तो लग चुकी थी, लेकिन यह नहीं मालूम था कि मिलाद कहाँ है। वे नहीं जानते थे कि वह ज़िंदा भी है या नहीं। हर बार जब वे उसकी तलाश में किसी दफ़्तर का दरवाज़ा खटखटाते, उन्हें कोई साफ़ जवाब न मिलता। उनसे बस यही कहा गया था कि मिलाद को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है। उम्मीद की एक मद्धम सी लौ ज़िंदा रखने के लिए बस यही एक जुमला काफ़ी था। वे मैदान-ए-इंक़लाब के इर्द-गिर्द स्थित सुरक्षा एजेंसियों के दफ़्तरों में पहुंचे; यह वही दिन थे जब कई अन्य परिवार…
میلاد شیدا گماسایی · ملایر · تهران،یافت آباد · کرج، مارلیک