جاویدنام یوسف محمدعلیزاده
जान गंवाना یوسف محمدعلیزاده 36 वर्ष में ایران पक्षी سیتی سنتر
लेखक: मेहरशीद
वह शब-ए-यलदा की रात थी; साल की सबसे लंबी रात। हर साल के दस्तूर की तरह, सब दादी के घर जमा हुए थे। यूसुफ़ बाक़ी लोगों से ज़रा देर से पहुँचा; हाथ में मिठाई का एक बड़ा डिब्बा लिए हुए। उसके आते ही कई लोग अपनी जगह से उठ खड़े हुए और उसके इस्तक़बाल के लिए आगे बढ़े। दादी ने उसे सीने से भींच लिया, कई बार चूमा और अपने चहेते पोते के लिए उसी ख़ास लाड और उमंग के साथ उसे अपने पहलू में बिठा लिया। रात बड़ी गर्मजोशी और अपनेपन से गुज़र रही थी; यलदा का दस्तरख़्वान सजा हुआ था, सब आपस में बातें कर रहे थे, हँस रहे थे, हँसी-ठिठोली चल रही थी, तालियाँ बज रही थीं और रक़्स हो रहा था। यूसुफ़ भी महफ़िल की रौनक़ बना हुआ था; हँसता, थिरकता और सबका साथ निभाता हुआ। इन्हीं बातों के दरमियान उसके काम-धंधे का ज़िक्र छिड़ा। लोगों ने पूछा कि काम-काज कैसा चल रहा है। यूसुफ़ ने ऐसे मुस्तक़बिल की बात की जो उसे कुछ ज़्यादा दूर नज़र नहीं आ रहा था: «ऊपर वाले का शुक्र है, बस कुछ ही दिनों में मैं अपने काम में तहलका मचा दूँगा, बहुत जल्द मशहूर हो जाऊँगा।» यूसुफ़ मोहम्मदअलीज़ादेह की पैदाइश २ मार्च १९८९ (११ इसफ़ंद १३६७) को हुई थी और ख़ानदान में सब उसे «अली» कहकर पुकारते थे। उसने बारहवीं तक तालीम हासिल की थी और हेयर ड्रेसिंग व टैटू आर्ट को अपने पेशे के रूप में चुना था। उसे टैटू का गहरा शौक़ था और इसमें महारत हासिल करने के लिए उसने कई ट…
یوسف محمدعلیزاده · پرند · تتوآرتیست