अमर नायक अमीरमोहम्मद क़ूर्त-बेगलो; माँ, डरो मत, यह मेरा ख़ून नहीं है

जान गंवाना امیرمحمد قورتبیگلو 22 वर्ष में ईरान तेहरान शाहरक क़ायमिया, इस्लामशहर

लेखक: नूरा

« यह मेरे लिए ईश्वर की ईदी है » २१ मार्च २००३ (१ फरवरदीन १३८२) को जब अमीरमोहम्मद कूर्त-बेगलो का जन्म हुआ, तो उसके पिता ने उसे अपनी गोद में उठा लिया और बस यही एक बात कही। उस दिन से, परिवार के लिए हर नए साल की शुरुआत केवल साल का बदलना भर नहीं थी; बल्कि उस बेटे का जन्मदिन था जिसके आने से घर में खुशियाँ आ गई थीं। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन ऐसा भी नौरोज़ आएगा जब हफ़्त-सीन की मेज़ पर उसी 'ईश्वर की ईदी' की जगह खाली होगी। अमीरमोहम्मद २२ साल का एक नौजवान था और इस्लामशहर के काएमिएह कस्बे में रहता था। वह कालीन धोने वाली एक कंपनी में ड्राइवर था और अपनी मेहनत से अपनी ज़िंदगी बना रहा था। जो कोई भी उसे जानता था, वह सबसे पहले उसके मिजाज की तारीफ करता था; एक बेहद मिलनसार, खुशमिजाज और जिंदादिल नौजवान जो बहुत जल्द लोगों के दिलों में अपनी जगह बना लेता था। खेलकूद सिर्फ उसका शौक नहीं था, बल्कि उसकी पहचान का एक हिस्सा था। वह बॉडीबिल्डिंग और पारंपरिक व्यायाम को पूरी गंभीरता से करता था और घुड़सवारी तथा निशानेबाजी में भी माहिर था। वह उन इंसानों में से था जो जहाँ भी जाते, अपने पीछे हँसी, दोस्ती और एक खूबसूरत याद छोड़ जाते थे। ८ जनवरी २०२६ (१८ दे १४०४) की शाम, अभी रात के आठ भी नहीं बजे थे कि घर के बाहर से विरोध-प्रदर्शनों की आवाज़ें आने लगीं। उसने अपने परिवार को अलविदा कहा और घर से बाहर निकल गया।…

امیرمحمد قورت بیگلو · شهرک قائمیه اسلامشهر · تهران

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