अमर नायक यासीन बीरानवंद; उम्मीद और शोक के बीच ६७ दिन
जान गंवाना यासीन बीरानवंद 21 वर्ष में ईरान खुर्रमआबाद
लेखक: महताब
२०२६ की सर्दियों (सर्दियाँ १४०४) में, ख़ुर्रमाबाद अब महज़ एक शहर नहीं रह गया था; वह ख़ामोशी और सुलगती बेचैनी के दरमियान धड़कता हुआ एक दिल बन चुका था। मौसम सर्द था, मगर शहर पर उससे भी कहीं ज़्यादा सर्द एक सन्नाटे का साया पसरा हुआ था। ३ जनवरी (१३ दे माह) को, ख़ुर्रमाबाद के लोग सुबह के पहले पहर से ही यह भांप रहे थे कि कुछ अप्रत्याशित घटने वाला है; रोज़मर्रा की ज़िंदगी और आम ख़बरों के दायरे से परे कुछ ऐसा, जिसमें एक सामूहिक घबराहट की बू रची-बसी थी। ८ और ९ जनवरी (१८ और १९ दे) तक पहुँचते-पहुँचते, सुरक्षा बलों की मौजूदगी और भी भारी हो चुकी थी। उनके वाहन चौराहों पर तैनात थे और शहर, पैनी निगरानी वाली नज़रों के साए में साँस ले रहा था। मानवाधिकार रिपोर्टों के अनुसार, सोशल मीडिया पर सक्रिय बताए जाने वाले कई नौजवानों को हिरासत में ले लिया गया था। धीरे-धीरे, ख़ुर्रमाबाद व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के अखाड़े में तब्दील हो गया। उस दिन मौजूद लोगों के बीच एक ऐसा नाम दर्ज हुआ, जो बाद में कई स्वतंत्र रिपोर्टों में भी बार-बार गूंजा: यासीन बैरानवंद। उसकी उम्र महज़ २१ साल थी। लोरों की सरज़मीं का एक नौजवान; असीम ऊर्जा और ज़िंदगी से लबरेज़। सोशल मीडिया पर सामने आए उसके वीडियो में उसकी सादी और दिलकश दुनिया की एक झलक देखी जा सकती है; एक ऐसा नौजवान जो जश्न और ख़ुशियों में दिल खोलकर हँसता और थिरकता था। उसे फ़ुटबॉल…
یاسین بیرانوند · نراتا · لرستان · خرم آباد